बिलासपुर.
शिक्षा के मंदिर से निकलकर अब शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण के सबसे बड़े अभियान यानी ‘जनगणना’ के मैदान में उतरने जा रहे हैं. भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच, जब स्कूल बंद रहेंगे, तब प्रदेश के हजारों सहायक शिक्षक और शिक्षक घर-घर जाकर डेटा जुटाने का काम करेंगे. शिक्षा विभाग ने सभी शिक्षकों की सूची तहसीलदारों को सौंप दी है, जिसके बाद अब ड्यूटी और ट्रेनिंग का चार्ट तैयार हो गया है.
शिक्षक 1 मई से जनगणना के कार्य में लग जाएंगे. आगामी जनगणना को लेकर शिक्षा विभाग ने कमर कस ली है. इस बार सहायक शिक्षकों और शिक्षकों को प्रगणक के रूप में तैनात करने की तैयारी पूरी हो चुकी है. शिक्षा विभाग ने अपने अंतर्गत आने वाले सभी सहायक शिक्षकों और शिक्षकों का डेटा संकलित कर तहसील कार्यालयों को भेज दिया है. अब तहसीलदार और स्थानीय प्रशासन इन सूचियों के आधार पर शिक्षकों की ड्यूटी अलग- अलग वार्डों और ग्राम पंचायतों में तय करेंगे. जनगणना का कार्य तकनीकी और संवेदनशील होता है, इसलिए इसे चरणों में पूरा किया जा रहा है. मास्टर ट्रेनर्स की ट्रेनिंग शुरू हो गई है. जो अप्रैल माह में जनगणना का कार्य करने वाले शिक्षकों को ट्रेनिंग देंगे. इसमें उन्हें मोबाइल ऐप और रजिस्टर में डेटा एंट्री के तरीके सिखाए जाएंगे. शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना कार्य में एक मई से लगेगी.
उसी दिन अवकाश से स्कूलों में ग्रीष्मकालीन शुरू होती है. उस दौरान शिक्षकों को भीषण गर्मी में आबंटित इलाके में घर-घर जाकर परिवार के सदस्यों की जानकारी इक्कठा करनी होगी. जहां एक ओर छात्र गर्मियों की छुट्टियों का आनंद लेंगे, वहीं शिक्षक 1 मई से हाथ में मोबाइल और रजिस्टर लेकर प्रगणना के काम में जुट जाएंगे. इस बार की जनगणना कागज पेन तक सीमित नहीं है. शिक्षकों को विशेष मोबाइल ऐप की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे डेटा सीधा सर्वर पर अपलोड होगा.

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