भोपाल
पुलिस महकमे में दशकों से फैले ‘अंगदराज’ का अब पूरी तरह अंत होने जा रहा है। एक पुलिस थाने में पांच साल और अनुविभाग में दस साल की सेवा दे चुके पुलिसकर्मियों की दो सूचियों में शामिल 795 आरक्षक-उपनिरीक्षकों के तबादले हो चुके हैं। वहीं कुछ पुलिसकर्मियों ने तिकड़म लगाकर अपने आप को इन सूची में शामिल होने से बचा लिया था। अब उनके लिए भोपाल पुलिस कमिश्नरेट की दूसरी सूची तैयार की जा रही है, जिसके बाद थानों-अनुविभागों में बचे हुए अंगदों के भी पैर उखड़ जाएंगे। बताया जा रहा है शहर के हर पुलिस थाने में पांच से दस ऐसे पुलिसकर्मी अब भी बचे हैं, जो पांच साल पूरे कर चुके हैं। यदि इस बार सभी जोन में पुलिसकर्मियों के सेवाकाल की वास्तविक स्थिति मुख्यालय डीसीपी को भेजी जाए तो कम से कम 200 पुलिसकर्मियों के तबादले होना निश्चित है।
पहली और दूसरी सूची अधूरी रही, तीसरी होगी निर्याणक
भोपाल डीसीपी मुख्यालय द्वारा 16 जून को 699 कर्मियों की तबादला सूची जारी की गई थी। इस सूची के बाद कई शिकायतें सामने आईं कि वर्षों से थानों में पदस्थ अनेक पुलिसकर्मियों के नाम इस सूची से बाहर रह गए हैं। इसके बाद शुक्रवार को दूसरी सूची जारी की गई। वहीं एक बार फिर शिकायतों के बाद डीसीपी स्तर पर दोबारा जांच के आदेश दिए गए। अलग-अलग जोन कार्यालय में अब नई सूची के लिए थानों से वास्तविक स्थिति लेकर तीसरी सूची तैयार की जा रही है, जिसे निर्याणक और अंतिम माना जाएगा।
दोनों सूची में आदेश को अवसर में बदला
पुलिस मुख्यालय के आदेश में थाने में पांच साल और अनुविभाग में दस साल के सेवाकाल करने वाले पुलिसकर्मियों के तबादले का जिक्र था। लेकिन डीसीपी कार्यालय में बैठे बाबूओं ने इसे अवसर की तरह लपका और ट्रांसफर उद्योग की तर्ज पर कई ऐसे पुलिसकर्मियों का तबादला करवा दिया, जिन्हें एक थाने में एक साल भी नहीं हुआ था। साथ ही नापसंद थानों में पदस्थ कई पुलिसकर्मियों को मनपसंद थानों का तोहफा भी दिया गया है।
तबादलों से बचने क्राइम ब्रांच ने निकाला तोड़
वर्षों से एक ही थाने और अनुविभाग में जमे पुलिसकर्मियों को हटाने के लिए आदेश क्या जारी हुआ कि क्राइम ब्रांच ने उसका तोड़ भी निकाल लिया। क्राइम ब्रांच में दशकों से जमे पुलिसकर्मियों को दूसरे थानों में न भेजा जाए, इसके लिए अधिकारियों ने क्राइम ब्रांच के अंतर्गत ही जोन व्यवस्था शुरू कर दी। अधिकारियों का कहना है कि हमने क्राइम शाखा को कमिश्नर प्रणाली की तरह जोन व्यवस्था में बांट दिया है। जिन पुलिसकर्मियों को एक जोन में पांच साल हो गए हैं, उन्हें दूसरे जोन भेजा गया है।
आदेश के बावजूद थानों से पैर हिलाने तैयार नहीं अंगद
इधर डीसीपी मुख्यालय से आदेश के 12 दिन बीत जाने के बावजूद कई पुलिसकर्मी अपने पुराने थानों से रवानगी लेकर नए थानों में आमद देने को तैयार नहीं हैं। वहीं जिन पुलिसकर्मियों को मनपसंद थाने मिले हैं, वे नए थानों में आमद देने को बेताब हैं। यहां तक की जोन के उच्च अधिकारियों को फोन कर रवानगी के आदेश देने के लिए गुहार लगा रहे हैं।

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