भोपाल
मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत आबादी भूमि पर आवास, दुकान या भूखंडधारकों को अचल संपत्ति का मालिकाना हक देने के लिए निःशुल्क रजिस्ट्री कराई जाएगी। इसके लिए मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश जारी किया गया है। इसके तहत सरकार अतिरिक्त शुल्क लेने से छूट दे सकती है।
अधिकार पत्र के बाद भी नहीं मिल रहा था लोन, इसलिए बनी नई योजना
प्रदेश में स्वामित्व योजना के अंतर्गत अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेखों का निर्माण किया गया, जिसमें 48.32 लाख निजी संपत्तियां शामिल हैं। इन्हें अधिकार पत्र तो दे दिए गए लेकिन उन्हें इसका कोई लाभ नहीं हुआ क्योंकि बैंकों ने इसके आधार पर ऋण नहीं दिया। उन्हें रजिस्ट्री चाहिए, इसलिए सरकार ने 'स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026' बनाई।
अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश जारी, मानसून सत्र में आएगा विधेयक
चूंकि, नियम में शुल्क से छूट का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 में अध्यादेश के माध्यम से संशोधन किया गया है। इससे सरकार को अतिरिक्त शुल्क लेने से छूट देने का अधिकार मिल गया। अभी ग्रामीण क्षेत्र में रजिस्ट्री पर एक प्रतिशत पंचायत उपकर और आधा प्रतिशत सेस लगता है।
इसी तरह मध्य प्रदेश उपकर अधिनियम में स्टाम्प ड्यूटी एवं पंजीयन शुल्क से छूट देने का प्रावधान भी अध्यादेश के माध्यम से किया जाएगा। दोनों संशोधनों के लिए विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक प्रस्तुत होंगे।

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