भोपाल
मध्यप्रदेश की मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए संचालित नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान मिली है। लखनऊ में आयोजित नेशनल वर्कशॉप ऑन सुमन रोडमैप 2030 में सुमन (सुरक्षित मातृत्व आश्वासन) के अंतर्गत मध्यप्रदेश द्वारा विकसित सुमन पंचायत और सुमन सखी चैटबॉट को राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट प्रैक्टिस एवं अन्य राज्यों में लागू किए जाने वाले स्केलेबल इंटरवेंशन के रूप में मान्यता मिली है।
उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखते हुए गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को सुरक्षित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ समुदाय की भागीदारी, डिजिटल तकनीक और डेटा आधारित मॉनिटरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। सुमन पंचायत और सुमन सखी चैटबॉट जैसे नवाचार इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इन पहलों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने, सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने और मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता एवं सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करने में सहायता मिल रही है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की इन पहलों का राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में स्वीकार किया जाना प्रदेश में किए जा रहे नवाचारों की प्रभावशीलता का प्रमाण है।
लखनऊ में राष्ट्रीय कार्यशाला में हुआ प्रदर्शन
2 एवं 3 सितंबर 2026 को लखनऊ में आयोजित नेशनल वर्कशॉप ऑन सुमन रोडमैप 2030 में मध्यप्रदेश की सुमन पंचायत और सुमन सखी चैटबॉट पहलों को प्रदर्शित किया गया। कार्यशाला में इन पहलों को समुदाय से जुड़ाव मजबूत करने, मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य संबंधी जानकारी तक पहुंच आसान बनाने तथा महिलाओं एवं उनके परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं को समझने और प्राप्त करने में सहायता देने के लिए सराहा गया। राष्ट्रीय कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों के समक्ष मध्यप्रदेश की इन पहलों की कार्यप्रणाली एवं उपयोगिता को प्रस्तुत किया गया। इनके प्रभावी मॉडल को देखते हुए इन्हें अन्य राज्यों में भी स्केलेबल इंटरवेंशन के रूप में अपनाया जाएगा। मध्यप्रदेश के दल में एमडी एनएचएम डॉ सलोनी सिडाना, वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ अर्चना मिश्रा सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
सुमन रोडमैप 2030 में मध्यप्रदेश की पहलें शामिल
मध्यप्रदेश की इन दोनों पहलों को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी सुमन रोडमैप 2030 गाइडलाइंस में भी शामिल किया गया है। इससे मध्यप्रदेश के सफल मॉडलों को राज्य की सीमाओं से बाहर ले जाने और अन्य राज्यों में आवश्यकता एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाने का अवसर मिलेगा।
सुमन पंचायत—समुदाय को मातृ स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की पहल
सुमन पंचायत का उद्देश्य पंचायत स्तर पर समुदाय की भागीदारी को मजबूत करते हुए सुरक्षित मातृत्व एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इस पहल के माध्यम से स्थानीय स्तर पर गर्भवती महिलाओं, उनके परिवारों और समुदाय को मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य से जुड़ी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने तथा स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने पर जोर दिया जाता है। पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर चर्चा और सामुदायिक सहभागिता बढ़ने से गर्भवती महिलाओं की आवश्यक सेवाओं तक पहुंच, समय पर जांच, संस्थागत प्रसव, प्रसव पूर्व एवं प्रसव पश्चात देखभाल तथा नवजात की देखभाल के प्रति जागरूकता को मजबूत करने में सहायता मिलती है। सुमन पंचायत का महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी न मानकर समुदाय और स्थानीय संस्थाओं की भागीदारी से सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में आगे बढ़ाया जाता है। सुमन पंचायत' (सुरक्षित मातृत्व आश्वासन पंचायत) पहल के अंतर्गत, यदि कोई ग्राम पंचायत अपने क्षेत्र में लगातार एक साल तक मातृ और शिशु मृत्यु दर को शून्य (जीरो) बनाए रखती है, तो सरकार द्वारा उसे ₹1 लाख (एक लाख रुपये) की प्रोत्साहन/पुरस्कार राशि दी जाती है।
सुमन सखी चैटबॉट—डिजिटल माध्यम से जानकारी तक आसान पहुंच
सुमन सखी चैटबॉट डिजिटल तकनीक के माध्यम से महिलाओं एवं परिवारों को मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की अभिनव पहल है। चैटबॉट के माध्यम से गर्भावस्था, प्रसव, नवजात शिशु की देखभाल तथा उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित जानकारी तक आसान पहुंच बनाने का प्रयास किया गया है। इसका उद्देश्य महिलाओं एवं परिवारों को सही समय पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना और उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने के लिए सक्षम बनाना है। डिजिटल माध्यम के उपयोग से जानकारी को अधिक सुलभ एवं उपयोगकर्ता-अनुकूल तरीके से उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है। यह पहल विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं और समुदाय के बीच सूचना के अंतर को कम करने की दिशा में उपयोगी है।
अनमोल 2.0 डैशबोर्ड भी रहा कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण
राष्ट्रीय कार्यशाला में अनमोल 2.0 डैशबोर्ड का भी प्रदर्शन किया गया। यह डैशबोर्ड हाई-रिस्क प्रेग्नेंट वोमेन (एचआरपी) की पहचान, ट्रैकिंग एवं फॉलोअप को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। डैशबोर्ड में हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी को एकीकृत रूप से उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। इससे स्वास्थ्य तंत्र के मैदानी एवं पर्यवेक्षण स्तर के अधिकारियों को ऐसी महिलाओं की पहचान करने, उनकी नियमित निगरानी करने और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से समय पर जोड़ने में सहायता मिलती है। अनमोल 2.0 में विशेष रूप से संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने पर फोकस किया गया है। हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान और निरंतर फॉलोअप से प्रसव के दौरान संभावित जोखिमों को कम करने तथा आवश्यकता पड़ने पर समय रहते उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्था में रेफरल सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

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