इंदौर
भाजपा के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री पारस जैन का सोमवार सुबह 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने इंदौर के ज्यूपिटर अस्पताल में अंतिम सांस ली।पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, पारस जैन पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे और उनका इलाज इंदौर के ज्यूपिटर अस्पताल में चल रहा था। सोमवार सुबह उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।
पारस जैन उज्जैन की राजनीति का एक प्रमुख चेहरा थे। वे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल थे और मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके थे। उनके निधन की खबर से उज्जैन सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
विधायक से लेकर मंत्री तक का सफर
भाजपा के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री पारसचंद्र जैन ने लंबे समय तक उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वे 1990 से 1998 तक तथा 2003 से लगातार उज्जैन उत्तर से विधायक रहे। प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में उनकी गिनती होती थी।
वर्ष 2005 से 2013 तक उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार में वन, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण जैसे विभागों में राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई। दिसंबर 2013 में उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया। वर्ष 2016 के मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें ऊर्जा तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग का दायित्व सौंपा गया।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
पारसचंद्र जैन का जन्म 20 जून 1950 को उज्जैन में स्व. समरथमल जैन और श्रीमती कैलाशबाई जैन के घर हुआ था। उनके पिता अनाज के व्यापारी थे। उन्होंने विक्रम विश्वविद्यालय से बी.कॉम की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद पारिवारिक अनाज व्यवसाय से जुड़ गए।
अपने परिचितों के बीच वे "पारस पहलवान" के नाम से भी जाने जाते थे। उन्हें व्यायाम, योग और खेल गतिविधियों का विशेष शौक था। वर्ष 1978 में उनका विवाह अंगूरबाला जैन से हुआ। धार्मिक नगरी उज्जैन में जन्म लेने के कारण उनकी आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियों में गहरी रुचि रही। वे सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी सक्रिय रहते थे। वर्ष 2016 के सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों में उन्होंने सिंहस्थ केंद्रीय समिति के सदस्य के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
छह बार विधायक बनकर किया जनता का प्रतिनिधित्व
पारस जैन का नाम उज्जैन की राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल रहा है. वे उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र से छह बार विधायक चुने गए और लंबे समय तक क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधित्व करते रहे. अपने सहज स्वभाव, कार्यकर्ताओं से संवाद और जनहित के मुद्दों पर सक्रियता के कारण उन्होंने लोगों के बीच विशेष पहचान बनाई. यही वजह रही कि राजनीति में उनकी पकड़ अंतिम समय तक बनी रही।
आठ साल तक संभाली मंत्री की जिम्मेदारी
मध्य प्रदेश सरकार में पारस जैन ने कई महत्वपूर्ण विभागों का नेतृत्व किया. वर्ष 2005 से 2013 के बीच उन्होंने राज्य मंत्री के रूप में वन, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभागों में जिम्मेदारी निभाई. इसके बाद दिसंबर 2013 में उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया. वर्ष 2016 में मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान उन्हें ऊर्जा विभाग का दायित्व भी सौंपा. उनके कार्यकाल को प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता के लिए याद किया जाता है।
शुरुआती राजनीतिक सफर
पारसचंद्र जैन की राजनीतिक यात्रा कॉलेज जीवन से शुरू हुई। वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सक्रिय कार्यकर्ता रहे और बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े। चुनावी राजनीति में आने से पहले उन्होंने सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
उन्होंने वर्ष 1990 में पहली बार उज्जैन उत्तर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसके बाद 1993 के विधानसभा चुनाव में, जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी, तब भी उन्होंने उज्जैन उत्तर सीट पर अपनी जीत बरकरार रखी। इसके बाद 2003 से लगातार वे इसी सीट से विधायक चुने जाते रहे।
टिकट नहीं मिला, फिर भी संगठन से जुड़े रहे
विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा ने पारस जैन को उम्मीदवार नहीं बनाया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पार्टी से दूरी नहीं बनाई. वे लगातार संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे और कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन में जुटे रहे. पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा और समर्पण ने उन्हें भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में विशेष स्थान दिलाया।
भाजपा नेताओं और समर्थकों ने जताया शोक
पारस जैन के निधन की खबर फैलते ही भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त किया. उज्जैन में उनके निवास पर लोगों का आना शुरू हो गया. समर्थकों का कहना है कि पारस जैन केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि जनता के बीच रहने वाले जनप्रतिनिधि थे, जिन्होंने हमेशा लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता दी।
कई बार कैबिनेट में पाई जगह
पारस जैन ने मध्य प्रदेश सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके थे। वर्ष 2005 से 2013 के बीच वे राज्य मंत्री के रूप में वन, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण जैसे विभागों से जुड़े रहे। दिसंबर 2013 में उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया। इसके बाद वर्ष 2016 के मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई।
उज्जैन में पारस पहलवान के नाम से थे मशहूर
पूर्व विधायक पारस जैन का जन्म साल 1950 में हुआ था। उन्होंने बीकॉम तक शिक्षा ली थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह अपने पिता के अनाज व्यापार से जुड़े रहे। छात्र जीवन से ही उन्होंने छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यालय परिषद (एबीवीपी) से राजनीति की शुरुआत की थी। उसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े। सामाजिक और संगठनात्मक कार्यों के जरिये वह सक्रिय राजनीति में आए। उज्जैन शहर के लोग उन्हें पारस पहलवान के नाम से जाने जाते थे। वह 2016 सिहस्थ की केंद्रीय समिति में रहे ओर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
मोहन यादव और शिवराज ने जताया दुख
मोहन यादव ने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ''वरिष्ठ भाजपा नेता, पूर्व मंत्री एवं उज्जैन उत्तर के पूर्व विधायक श्रद्धेय श्री पारस चंद्र जैन जी के निधन का समाचार सुनकर मन दुखी है। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। बाबा महाकाल से प्रार्थना है कि दिवंगत को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें एवं शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति दें।ॐ शांति!''
वहीं, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी ‘एक्स’ पर लिखा, ''मध्यप्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री, उज्जैन उत्तर के पूर्व विधायक, वरिष्ठ राजनेता, मेरे आत्मीय साथी श्री पारस चंद्र जैन जी नहीं रहे। पारस जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित स्वयंसेवक एवं भारतीय जनता पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता रहे हैं। उनके निधन का समाचार सुनकर दु:खी एवं स्तब्ध हूं। पारस जी ने मध्यप्रदेश और उज्जैन की जनता की समर्पित भाव से सेवा की है। वे कुशल संगठक और सफल प्रशासक के साथ-साथ योग तथा व्यायाम के बड़े प्रेरक रहे हैं। उन्हें 'पारस पहलवान' के नाम से जाना जाता था। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिवारजनों के साथ हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोक-संतप्त परिजनों को यह अपार दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति!''
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी पारस जैन के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि वरिष्ठ भाजपा नेता, पूर्व मंत्री और उज्जैन उत्तर के पूर्व विधायक श्रद्धेय पारस चंद्र जैन के निधन का समाचार सुनकर मन दुखी है. मुख्यमंत्री ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बाबा महाकाल से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें और शोकाकुल परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति दें।
आज दोपहर 3 बजे निकलेगी अंतिम यात्रा
पूर्व मंत्री पारसचंद्र जैन की अंतिम यात्रा आज दोपहर 3 बजे उज्जैन स्थित हिरामिल मार्ग, अरिहंत नगर स्थित उनके निवास से निकाली जाएगी। उनके अंतिम दर्शन और अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में समर्थकों, जनप्रतिनिधियों और भाजपा कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है

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