जिन्दल स्टील ने रचा इतिहास, कोयला गैसीफिकेशन क्रांति से ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सस्टेनेबल स्टील की राह दिखाई
रायपुर
जिन्दल स्टील ने उन्नत कोयला गैसीफिकेशन के माध्यम से 'स्वदेशी' कोयले के बेहतरीन उपयोग का मार्ग प्रशस्त किया है, जिससे कम कार्बन वाले स्टील के उत्पादन के साथ-साथ भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है।
जिन्दल स्टील ने दुनिया में पहली बार एक ऐसी तकनीक (कोयला गैसीफिकेशन) का सफल प्रयोग किया है, जिससे स्वदेशी कोयले से गैस (सिनगैस) बनाकर लोहा (डीआरआई) तैयार किया जा रहा है। सीधे शब्दों में कहें तो कंपनी ने विदेशी गैस या महंगे आयातित कोयले के बजाय अपने देश के कोयले को साफ-सुथरी गैस में बदलकर स्टील बनाने की बड़ी कामयाबी हासिल की है।
प्राकृतिक गैस, एलपीजी और प्रोपेन की कमी को दूर करने के लिए जिन्दल स्टील ने अब गैल्वनाइजिंग और कलर कोटिंग लाइन भट्टियों में सिनगैस का सफल प्रयोग किया है, जो स्टील इंडस्ट्री में पहली बार हुआ है। यह प्रयोग आज की कठिन परिस्थितियों में ईंधन की कमी को दूर करने में मददगार साबित हुआ है।
स्टील जगत को नई दिशा दिखाते हुए जिन्दल स्टील ने सिनगैस से ब्लास्ट फर्नेस संचालित कर आयातित कोकिंग कोल पर देश की निर्भरता घटाई है और प्रति टन स्टील उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन की मात्रा उल्लेखनीय स्तर तक कम करने में भी कामयाबी हासिल की है। स्टील उत्पादन की वैल्यू चेन में सिनगैस का उपयोग निश्चित रूप से ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचेगा।
गौरतलब है कि भारत सरकार की भावी नीतियों और प्रोत्साहनों में राष्ट्रीय कोयला गैसीफिकेशन मिशन शामिल है, इसलिए उम्मीद है कि कोयला गैसीफिकेशन तकनीक को अपनाने में तेजी आएगी और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए देश में हो रहे इस प्रयास को समर्थन मिलेगा।
इस संबंध में जिन्दल स्टील, अंगुल के कार्यकारी निदेशक श्री पी.के. बीजू नायर ने कहा:
"स्वदेशी कोयले से बनी यह गैस (सिनगैस) विदेशों से आने वाले महंगे मेथनॉल, अमोनिया और एलएनजी की जगह ले सकती है। भारत को अपनी तरक्की और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए अपने पास मौजूद कोयले के विशाल भंडार का सही उपयोग करना चाहिए। अगर हम कोयला गैसीफिकेशन के साथ कार्बन नियंत्रण की तकनीक (CCUS) का उपयोग करें तो न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानकों (CBAM) पर खरा उतरकर हमारा स्टील, विदेशी बाजारों में और भी मजबूत बनेगा।"
स्वदेशी कोयले का उपयोग और उन्नत स्वच्छ कोयला गैसीफिकेशन तकनीक के माध्यम से जिन्दल स्टील, सस्टेनेबल और सस्ता स्टील उपलब्ध कराते हुए 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टि को आगे बढ़ा रहा है।
जिन्दल स्टील के बारे में
जिन्दल स्टील भारत के शीर्ष स्टील उत्पादकों में से एक है, जो अपनी कार्यक्षमता और बेहतरीन क्वालिटी के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। कंपनी का 'माइन-टू-मेटल' मॉडल इसे खास बनाता है, जहां खदानों से लेकर तैयार स्टील तक, सारा काम अपने संसाधनों और आधुनिक तकनीक से होता है। 12 बिलियन डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा निवेश के साथ कंपनी के पास अंगुल, रायगढ़ और पतरातू में विश्वस्तरीय स्टील प्लांट हैं। जिन्दल स्टील आज न केवल भारत में, बल्कि अफ्रीका तक अपने मजबूत नेटवर्क के जरिये देश की तरक्की में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

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