नई दिल्ली
भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले कुछ समय में तनावपूर्ण हालात देखने को मिले थे, जिससे द्विपक्षीय रिश्तों पर असर पड़ा। राजनीतिक बदलाव और सुरक्षा चिंताओं के कारण वीजा सेवाएं भी प्रभावित हुई थी। हालांकि बांग्लादेश में नई सरकार बनने के बाद से दोनों देशों के संबंधों में काफी सुधार देखने को मिल रहे है। इसी कड़ी में एक और बड़ा कदम उठाते हुए दोनों देशों के बीच वीजा सेवाओं को फिर से पूरी तरह बहाल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
बांग्लादेश ने भारतीयों के लिए सभी श्रेणी के वीजा शुरू किए
बांग्लादेश ने भारतीय नागरिकों के लिए सभी श्रेणियों में वीजा जारी करना शुरू कर दिया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खालिलुर रहमान ने हाल ही में भारत दौरे के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। वर्तमान में नई दिल्ली, कोलकाता, अगरतला, मुंबई और चेन्नई स्थित बांग्लादेश के सभी वीजा केंद्र पूरी तरह कार्यरत हैं। बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह ने बताया कि दिसंबर में सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ी थीं, लेकिन फरवरी में उन्हें फिर से शुरू कर दिया गया। अब ढाका चाहता है कि भारत भी जल्द इसी तरह की पूर्ण बहाली कर दे।
भारत भी वीजा सेवा सामान्य करने की योजना बना रहा
भारत की ओर से वीजा सेवाओं को धीरे-धीरे सामान्य करने की योजना बनाई जा रही है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने फरवरी में ढाका का दौरा किया था, जहां वे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। यह दौरा प्रधानमंत्री तारिके रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए हुआ था। नई सरकार के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों ने रिश्तों को फिर से संतुलित करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। इससे पहले अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के दौर में संबंधों में खटास आई थी, खासकर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के हटने के बाद।
व्यापार, पर्यटन और पारिवारिक यात्राओं को मिलेग बढ़ावा
वीजा सेवाओं के सामान्य होने से व्यापार, पर्यटन और पारिवारिक यात्राओं को बढ़ावा मिलेगा। वर्तमान में भारतीय वीजा सेवाएं बांग्लादेशी नागरिकों के लिए केवल 15 से 20 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रही हैं, जिसमें मेडिकल और पारिवारिक वीजा को प्राथमिकता दी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, बांग्लादेश से भारत आने वाले पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई है। 2023 में जहां 21.2 लाख लोग भारत आए थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर 4.7 लाख रह गई। पश्चिम बंगाल प्रमुख गंतव्य बना हुआ है। हाल ही में भारत ने ऊर्जा संकट से जूझ रहे बांग्लादेश को डीजल की आपूर्ति भी की, जिससे दोनों देशों के सहयोग को नई मजबूती मिली है।

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