घर के आंगन में तुलसी का एक पौधा होना हमारी संस्कृति का सबसे सुंदर हिस्सा है। हम सब जानते हैं कि तुलसी शुभ होती है, लेकिन अक्सर लोग इस उलझन में रहते हैं कि घर के लिए रामा या श्यामा में से कौन सी तुलसी बेहतर है?
साथ ही, इस बात से कई लोग अंजान रहते हैं कि क्या इन दोनों को एक साथ लगा सकते हैं? और इनका वास्तु से क्या लेना-देना है?
रामा और श्यामा तुलसी में फर्क क्या है?
रामा तुलसी: इसकी पत्तियां हल्के हरे रंग की होती हैं और इसका स्वाद थोड़ा मीठा होता है। इसे 'उज्ज्वल तुलसी' भी कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, यह घर में सुख और शांति का प्रतीक है।
श्यामा तुलसी: इसकी पत्तियां थोड़ी बैंगनी या गहरे रंग की होती हैं। क्योंकि, इसका रंग भगवान कृष्ण (श्याम) से मिलता-जुलता है, इसलिए इसे श्यामा या कृष्ण तुलसी कहते हैं। आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है।
वास्तु के नियम और सही दिशा
वास्तु शास्त्र के मुताबिक, तुलसी का पौधा सही दिशा में हो, तभी वह घर में खुशहाली लाता है।
सबसे बेहतर दिशा: तुलसी को हमेशा उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना चाहिए। यह दिशा कुबेर और मां लक्ष्मी की मानी जाती है।
पूर्व: अगर ऊपर वाली जगह न हो, तो आप इसे पूर्व दिशा में भी रख सकते हैं। यह घर में सूर्य की तरह सकारात्मक ऊर्जा भरती है।
कहां न लगाएं: भूलकर भी तुलसी को दक्षिण दिशा में न रखें। इसे यमराज की दिशा माना जाता है और यहां रखी तुलसी फायदे की जगह नुकसान कर सकती है।
क्या कहते हैं हमारे शास्त्र?
पद्म पुराण के अनुसार, तुलसी का दर्शन ही मनुष्य के पापों का नाश कर देता है। जिस घर में तुलसी की सेवा होती है, वहां नकारात्मकता कभी नहीं टिकती।
स्कंद पुराण पुराण के अनुसार, तुलसी को जल देने और उसकी परिक्रमा करने से स्वास्थ्य और समृद्धि मिलती है।
वास्तु शास्त्र के मुताबिक, तुलसी को 'वास्तु दोष' दूर करने वाला सबसे प्रभावशाली पौधा बताया गया है।
दोनों तुलसी लगाने के फायदे
आप रामा और श्यामा दोनों तुलसी को एक साथ लगा सकते हैं। रामा तुलसी घर में आपसी प्रेम और मानसिक सुकून लाती है, वहीं श्यामा तुलसी स्वास्थ्य और धन-दौलत के रास्ते खोलती है।

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