नई दिल्ली
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 597 करोड़ रुपये के फ्रॉड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। दरअसल, ईडी ने चंडीगढ़, मोहाली, पंचकुला, गुरुग्राम और बेंगलुरु में 19 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। वहीं, एजेंसी ने फ्रॉड से जुड़े 90 से अधिक बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं। आइए डिटेल जान लेते हैं कि ईडी की जांच कहां तक पहुंची है।
कहां-कहां पर छापेमारी
ईडी के चंडीगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा 12 मार्च को चलाए गए इन तलाशी अभियानों में बैंक के पूर्व कर्मचारियों रिभव ऋषि और अभय कुमार, उनके परिवार के सदस्यों से जुडे परिसर शामिल हैं। इसके अलावा, फ्रॉड से जुड़े कई लाभार्थी फर्जी कंपनी से जुड़े परिसरों में भी छापेमारी की गई। इन कंपनियों में स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज, मां वैभव लक्ष्मी इंटीरियर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। सावन ज्वैलर्स जैसे ज्वैलर्स और रियल एस्टेट डेवलपर विक्रम वधवा और उनकी व्यावसायिक संस्थाओं के परिसरों की भी तलाशी ली गई।
क्या कहा जांच एजेंसी ने?
जांच एजेंसी के अनुसार, इस घोटाले में हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम और अन्य सरकारी खातों से संबंधित लगभग 597 करोड़ रुपये की सरकारी धनराशि का गबन शामिल था। यह धनराशि बैंक में सावधि जमा के रूप में रखी जानी थी लेकिन आरोपियों ने कथित तौर पर बिना अनुमति के इसे हड़प लिया। ईडी के मुताबिक उसने इस साल फरवरी में पंचकुला में राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो द्वारा आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में हरियाणा के विकास और पंचायत विभाग के बैंक खातों में शेष राशि के मिलान में विसंगति के संबंध में दर्ज एफआईआर के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत अपनी जांच शुरू की।
जांच में पता चला कि गबन की गई रकम को कई फर्जी कंपनियों के माध्यम से इधर-उधर भेजा गया था। जांचकर्ताओं ने बताया कि कथित तौर पर इस प्रक्रिया में स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नामक एक फर्जी कंपनी का गठन शामिल था, जिसके जरिए सरकारी धन की बड़ी रकम को शुरू में गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया था। इस कंपनी के साझेदार स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला हैं।
एक साल से चल रहा था खेल
ईडी ने बताया कि बाद में अधिकांश रकम ज्वैलर्स के बैंक खातों के माध्यम से फर्जी बिलों द्वारा सोने की खरीद का दिखावा करने के लिए भेजी गई। जांचकर्ताओं के अनुसार यह धोखाधड़ी पिछले लगभग एक वर्ष से बैंक के पूर्व कर्मचारियों की मदद से की जा रही थी। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व कर्मचारी रिभव ऋषि पर आरोप है कि उन्होंने कई फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल करके धनराशि को गबन किया। एजेंसी के मुताबिक अपराध की कुछ धनराशि ऋषि और उनकी पत्नी दिव्या अरोरा के बैंक खातों में स्थानांतरित की गई थी। बता दें कि रिभव ने जून 2025 में इस्तीफा दे दिया था।
ईडी का दावा है कि मोहाली में परियोजनाओं के मालिक होटल व्यवसायी और रियल एस्टेट डेवलपर विक्रम वधवा ने भी बड़ी मात्रा में धनराशि का गबन किया। वधवा ने कथित तौर पर अपराध की धनराशि सीधे अपने बैंक खातों में प्राप्त की और फिर उसे प्रिस्मा रेजिडेंसी एलएलपी, किंसपायर रियल्टी एलएलपी और मार्टेल बिल्डवेल एलएलपी सहित रियल एस्टेट फर्मों में स्थानांतरित कर दिया।

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