नई दिल्ली
देश में रसोई गैस की सप्लाई को सुचारु बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। होटलों और रेस्तरां में कमर्शियल एलपीजी की कमी की खबरों के बीच सरकार ने एसेंशियल कमोडिटीज (ईसी) एक्ट लागू कर दिया है, ताकि घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी रह सके।
सरकार ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल यूनिट्स को निर्देश दिया है कि वे एलपीजी के उत्पादन को अधिकतम स्तर तक बढ़ाएं। इसके साथ ही इन इकाइयों को प्रमुख हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स को एलपीजी पूल की ओर डायवर्ट करने के लिए कहा गया है, ताकि घरेलू उपयोग के लिए गैस की उपलब्धता बढ़ाई जा सके और सप्लाई स्थिर बनी रहे। इसी के साथ सरकार ने नेचुरल गैस (सप्लाई रेगुलेशन) ऑर्डर 2026 भी जारी किया है। इस आदेश के तहत प्राकृतिक गैस, एलएनजी और री-गैसिफाइड एलएनजी के उत्पादन और अलग-अलग सेक्टरों में उसके आवंटन को नियंत्रित किया जाएगा। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराना है।
सरकार के मुताबिक, प्राथमिकता वाले सेक्टरों में घरेलू पीएनजी सप्लाई, परिवहन के लिए सीएनजी, एलपीजी उत्पादन, पाइपलाइन कंप्रेसर के लिए ईंधन, फर्टिलाइजर प्लांट, चाय उद्योग और अन्य महत्वपूर्ण औद्योगिक उपभोक्ता शामिल हैं। इस व्यवस्था को लागू करने की जिम्मेदारी भारतीय गैस प्राधिकरण लिमिटेड (गेल) को सौंपी गई है, जो पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के साथ मिलकर सेक्टर-वार गैस आवंटन और सप्लाई व्यवस्था की निगरानी करेगा।
उधर, बाजार में घबराहट के कारण बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की दोबारा बुकिंग के लिए न्यूनतम इंतजार अवधि 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, ईरान से जुड़े युद्ध और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण लोगों में सप्लाई बाधित होने का डर पैदा हो गया था, जिससे बड़ी संख्या में लोगों ने घबराकर सिलेंडर बुक कराना शुरू कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि देश में एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है। बुकिंग अवधि बढ़ाने का फैसला केवल स्टॉक और इन्वेंट्री को बेहतर तरीके से संभालने के लिए लिया गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, घबराहट में की गई बुकिंग के कारण एलपीजी की मांग में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक अधिकारी ने बताया कि औसतन एक परिवार साल में 14.2 किलोग्राम के 7 से 8 एलपीजी सिलेंडर ही इस्तेमाल करता है और सामान्य परिस्थितियों में उन्हें छह हफ्तों से पहले नया सिलेंडर लेने की जरूरत नहीं पड़ती।
इस बीच एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का कोई फैसला नहीं लिया गया है। सरकारी तेल कंपनियां, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम, अभी के लिए लागत का अतिरिक्त दबाव खुद ही वहन करेंगी।
उन्होंने कहा कि सरकार अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर लगातार नजर बनाए हुए है, लेकिन फिलहाल खुदरा ईंधन कीमतें बढ़ाने की कोई तत्काल योजना नहीं है।वहीं, संसद को भी बताया गया है कि भारत के पास इस समय कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का कुल 74 दिनों का भंडारण क्षमता मौजूद है। यह भंडार किसी भी प्रतिकूल परिस्थिति, जैसे भू-राजनीतिक तनाव या युद्ध की स्थिति में सप्लाई बाधित होने पर देश को संभालने में मदद कर सकता है।

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