धार
इंदौर जोन की पुलिस जांच में बीमा क्लेम के नाम पर चल रहे एक बड़े संगठित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। धार जिले से जुड़े इस मामले में दो वकीलों समेत पांच आरोपितों ने सुनियोजित तरीके से अज्ञात वाहन से होने वाली दुर्घटनाओं के मामलों में कहानी गढ़कर बीमा कंपनियों से लाखों रुपये का क्लेम हासिल करने की दावा कोर्ट में प्रस्तुत करते थे।
धार के नौगांव थान पर चार आरोपितों व धरमपुरी थाने पर तीन आरोपितों पर कुल 12 बीमा दावे प्रस्तुत करने के मालमें दो प्रकरण दर्ज किए गए है। बीमा दावे के प्रकरण अधिक भी हो सकते है।
कार्यालय पुलिस महानिरीक्षक (ग्रामीण) इंदौर जोन को प्राप्त शिकायत के आधार पर की गई जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आवेदक रवि श्रीवास, श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, इंदौर द्वारा दी गई शिकायत में बताया गया कि आरोपितों द्वारा फर्जी दुर्घटनाएं दिखाकर बीमा क्लेम का दाावा किया जा रहा था।
धरमपुरी थाने पर दर्ज प्रकरण में आरोपित मुन्नालाल देवड़ा धरमपुरी और फिरोज खान धार है। से दोनों पेशे से वकील हैं। इस प्रकरण में प्रतीक गोस्वामी निवास धार भी आरोपित है।
ये अज्ञात वाहन से हुई दुर्घटनाओं में मृतकों के परिजन से संपर्क करते थे। उन्हें मोटा मुआवजा दिलाने का झांसा देकर पूरा क्लेम प्रोसेस करते थे।
जबकि धार के नौगांव थाने पर दर्ज प्रकरण में उक्त प्रतीक गोस्वामी निवासी धारेश्वर मार्ग धार उमेश पुत्र राकेश सांखला निवासी ग्राम धुलेट सरदारपुर, लोकेंद्र देवड़ा व फिरोज खान निवासीयान धार आरोपित बनाए गए है।
प्रतीक गोस्वामी की भूमिका सबसे संदिग्ध
- जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य प्रतीक गोस्वामी की भूमिका को लेकर सामने आया। वह अलग-अलग मामलों में कभी वाहन मालिक तो कभी ड्राइवर बन जाता था।
- कई केसों में एक ही व्यक्ति का इस तरह अलग-अलग भूमिका में होना पुलिस के संदेह का बड़ा कारण बना। आरोपित फर्जी तरीके से यह दर्शाते थे कि उनके ही वाहन से व्यक्ति को टक्कर लगी है।
- जबकि वास्तविकता में जो वाहन हादसा कारित कर जाता था उसकी कोई जानकारी नहीं होती थी।
- पूरे नेटवर्क के तहत झूठे दस्तावेज, मनगढ़ंत साक्ष्य और फर्जी गवाह तैयार किए जाते थे। इसके बाद इन मामलों को न्यायालय में प्रस्तुत कर बीमा कंपनियों से क्लेम हासिल किया जाता था।
करीब 12 मामले हुए थे प्रस्तुत
- धार, धरमपुरी और मनावर न्यायालय में ऐसे लगभग 12 मामलों का खुलासा हुआ है, जिनमें क्लेम के दावे किए गए। अन्य स्थानों के मामलों की भी जांच जारी है।
- पुलिस ने केस डायरी, चालान, वाहन स्वामित्व, ड्राइविंग लाइसेंस, ई-कोर्ट रिकॉर्ड और मोबाइल कॉल डिटेल (सीडीआर) का मिलान किया।
- तकनीकी साक्ष्यों ने आरोपितों के बीच आपसी तालमेल और साजिश की पुष्टि कर दी।
- प्रारंभिक जांच में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318(4), 229(1), 246 और 61(2) के तहत तीनों पर प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस आगामी कार्रवाई कर रही है।
- धार के नौगांव थाने सहित धरमपुरी में आरोपित के खिलाफ प्रकरण दर्ज हुए है। कंपनी के आवेदन की जांच के बाद मामला प्रकाश में आया है। विवेचना कर आगामी कार्रवाई की जा रही है।

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