भोपाल
राजधानी में मेट्रो यात्रियों के लिए समय में बदलाव किया गया है।आज 3 अप्रैल, शुक्रवार से मेट्रो ट्रेनें अब सुबह 11 बजे से शाम 4:30 बजे तक संचालित होंगी। अब तक मेट्रो सेवाएं दोपहर 12 बजे से शाम 7:30 बजे तक चल रही थीं। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी काम पूरा होते ही समय को फिर से सामान्य किया जा सकता है। मेट्रो का संचालन फिलहाल सुभाष नगर स्टेशन से लेकर एम्स तक हो रहा है, जिसमें कुल आठ स्टेशन शामिल हैं। यह रूट शुरुआत से ही ट्रायल और सीमित संचालन के तहत चलाया जा रहा है।
टनल बनाने का काम जल्द होगा शुरू
मेट्रो परियोजना के तहत अंडरग्राउंड टनल बनाने का काम भी अब तेजी पकड़ने वाला है। टनल बोरिंग मशीन (TBM) अगले दो-तीन दिनों में खुदाई शुरू करेगी। मशीन को हाल ही में 24 मीटर गहराई तक उतारा गया है और फिलहाल उसकी तकनीकी सेटिंग का काम चल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मशीन प्रतिदिन करीब 14 मीटर तक खुदाई कर सकती है, लेकिन भोपाल की पथरीली जमीन को देखते हुए यह गति घटकर 5 से 7 मीटर प्रतिदिन रहने की संभावना है। पहली मशीन द्वारा करीब 50 मीटर टनल तैयार करने के बाद दूसरी TBM को भी उतारा जाएगा। दोनों मशीनों के जरिए टनल निर्माण का काम आगे बढ़ाया जाएगा।
मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि सुभाष नगर से एम्स के बीच प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम शुरू हुआ है। करीब 30 किमी के लिए हुए 800 करोड़ रुपए के टेंडर का यह पहला चरण है। अभी सिग्नलिंग सिस्टम नहीं होने के कारण मेट्रो प्रबंधन को मजबूरन केवल एक ही ट्रैक (डाउन ट्रैक) पर ट्रेन चलानी पड़ रही हैं। यही वजह है कि ट्रेनों की फ्रिक्वेंसी 75 मिनट रखी गई है, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।
सिग्नलिंग के काम के चलते ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर का ट्रैक प्रभावित रहेगा। हालांकि, प्रबंधन ने यह साफ नहीं किया है कि काम कब तक चलेगा और मेट्रो कब तक इसी टाइमिंग पर चलती रहेगी।
20 दिसंबर-25 को शुरू हुई थी मेट्रो भोपाल मेट्रो का उद्घाटन पिछले साल 20 दिसंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर ने किया था। इसके अगले दिन यानी, 21 दिसंबर से कमर्शियल रन शुरू हो गया। इस दिन से आम लोग मेट्रो में सफर करने लगे।
मेट्रो को शुरुआत में अच्छे पैसेंजर मिले, लेकिन बाद में संख्या घटती गई। वर्तमान में मेट्रो में न के बराबर यात्री सफर कर रहे हैं। 5 जनवरी को पहली बार टाइमिंग और फेरे बदले गए थे। शुरुआत में 17 फेरे और सुबह 9 बजे से मेट्रो दौड़ने लगी थी।
जब बदलाव हुआ तो फेरे घटकर 13 हो गए। वहीं, टाइमिंग दोपहर 12 से शाम 7.30 बजे तक कर दी गई थी। वर्तमान में इसी टाइमिंग पर मेट्रो का संचालन हो रहा था।
तीसरी बार शेड्यूल बनने के बाद फेरे 13 से घटकर 9 हो गए हैं। इनमें एम्स से सुभाषनगर के बीच 5 और सुभाषनगर से एम्स के बीच 4 फेरे शामिल हैं।
डेढ़ साल तक चलेगा निर्माण कार्य
टनल की खुदाई पूरी होने में करीब दो महीने लग सकते हैं, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। पूरा निर्माण कार्य पूरा होने में कम से कम डेढ़ साल का समय लगने का अनुमान है। यह टनल ओल्ड रेलवे स्टेशन क्षेत्र से पुल पातरा की ओर निकलेगा और इसमें अप और डाउन दोनों दिशाओं के लिए अलग-अलग मेट्रो लाइन बनाई जाएंगी।
भोपाल में लागू हुई नई कलेक्टर गाइडलाइन, मेट्रो ट्रैक के किनारे जाम जस के तस!
नये फाइनेंशियल ईयर के शुरू होने के साथ ही राजधानी भोपाल में नई कलेक्टर गाइडलाइन भी लागू हो गई है. जिसके बाद अब भोपाल में प्रॉपर्टी खरीदने से लेकर रजिस्ट्री कराना महंगा हो गया है. नई गाइडलाइन में भोपाल मेट्रो ट्रैक के प्रॉपर्टी रेट को लगातार दूसरे साल भी नहीं बढ़ाया गया है. जिसके पीछे वजह इन इलाकों में रेट कम रखकर यहां तेजी से डेवलपमेंट करना बताई जा रही है. कलेक्टर गाइडलाइन में तय दर 13 हजार रुपए वर्गमीटर से लेकर 40 हजार वर्गमीटर तक तय हुई है. जिसके बाद हर वर्गफीट 1300 रुपए से लेकर 4000 रुपए पंजीयन शुल्क लगेगा।
भोपाल मेट्रो के किनारे तेज होगा डेवलपमेंट वर्क, एक ही जगह रेजिडेंशियल-कॉमर्शियल स्पेस और मार्केट बनाने की प्लानिंग
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकार भोपाल मेट्रो कॉर्रिडोर के आस-पास ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) वर्क को बूस्ट देने के लिए लगातार दूसरे साल कलेक्टर गाइडलाइन में मेट्रो के किनारे की जमीन के रेट नहीं बदले गए हैं. प्रदेश सरकार इन इलाकों में एक ही जगह पर रेजिडेंशियल-कॉमर्शियल और मार्केट स्पेस बनाने पर प्लांनिग कर रही है।
पुराने भोपाल इतना हुआ प्रति वर्गमीटर प्रॉपर्टी का रेट
अगर बात की जाए मेट्रो कॉर्रिडोर किनारे सबसे महंगी जमीन की तो भोपाल में करोंद इलाके में रेट सबसे हाई हैं. जहां नई गाइडलाइन में करोंद इलाके में रजिस्ट्री दर 40 हजार रुपए वर्गमीटर निर्धारित की गई है. इसके अलावा पुराने भोपाल में नए प्रॉपर्टी के रेट 12 हजार रुपए वर्गमीटर से 15 हजार वर्गमीटर निर्धारित किया गया है।

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