रायपुर
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन रही हैं। बेटियों के सुरक्षित भविष्य से लेकर किसानों की आय बढ़ाने, जल संरक्षण, स्वरोजगार और ग्रामीण अधोसंरचना के विकास तक शासन की विभिन्न योजनाएं गांवों में नई संभावनाओं के द्वार खोल रही हैं। सरगुजा जिले में इन योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहे परिवारों की कहानियां बताती हैं कि जब शासन की सहायता और ग्रामीणों की मेहनत एक साथ जुड़ती है, तो सीमित संसाधनों के बीच भी आत्मनिर्भरता और खुशहाली की राह आसान होने लगती है।
सरगुजा के ग्रामीण अंचलों में नोनी सुरक्षा योजना बेटियों के भविष्य को आर्थिक संबल प्रदान कर रही है, वहीं राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना से पशुपालन को नियमित आय के साधन के रूप में विकसित करने में मदद मिल रही है। ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत निर्मित आजीविका डबरियां जल संरक्षण के साथ खेती और मछली पालन के अवसर बढ़ा रही हैं। दूसरी ओर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से गांवों में बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध होने से ग्रामीणों की शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और रोजगार के अवसरों तक पहुंच सुगम हो रही है। विकास की ये पहलें ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं।
नोनी सुरक्षा योजना से आंचल के सपनों को मिला आर्थिक संबल
हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनकी बेटी अच्छी शिक्षा प्राप्त करे और आत्मनिर्भर बनकर अपने सपनों को साकार करे। आर्थिक रूप से सीमित संसाधनों वाले परिवारों के लिए बेटियों के भविष्य की चिंता स्वाभाविक होती है। ऐसे परिवारों को छत्तीसगढ़ शासन की नोनी सुरक्षा योजना महत्वपूर्ण सहारा प्रदान कर रही है। अम्बिकापुर विकासखंड की ग्राम पंचायत कृष्णापुर निवासी मती मानती राजवाड़े की बेटी आंचल राजवाड़े को इस योजना के अंतर्गत भारतीय जीवन बीमा निगम के माध्यम से एक लाख रुपये का बॉन्ड प्राप्त हुआ है।
मानती राजवाड़े के लिए यह बॉन्ड केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि बेटी के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद भी है। योजना की निर्धारित शर्तों के अनुसार आंचल के 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर मिलने वाली राशि का उपयोग उसकी आगे की पढ़ाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए किया जा सकेगा। इससे परिवार को भविष्य में शिक्षा संबंधी खर्चों की व्यवस्था करने में सहायता मिलेगी। नोनी सुरक्षा योजना बेटियों के प्रति परिवारों में सकारात्मक सोच विकसित करने के साथ उनकी शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
डेयरी व्यवसाय ने बदली मनोज की आर्थिक स्थिति, प्रतिदिन 30 लीटर दूध बेचकर कर रहे आमदनी
कृषि प्रधान ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन किसानों के लिए आय का महत्वपूर्ण अतिरिक्त साधन बन रहा है। सरगुजा जिले के लमगांव निवासी मनोज कुमार पटेल ने राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना का लाभ लेकर डेयरी व्यवसाय को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाया है। शासन की सहायता और स्वयं की मेहनत से उन्होंने दूध उत्पादन एवं विक्रय का कार्य आगे बढ़ाया है। आज वे प्रतिदिन लगभग 30 लीटर दूध का विक्रय कर करीब 1,200 रुपये की आमदनी अर्जित कर रहे हैं।
मनोज कुमार पटेल के अनुसार, दूध विक्रय से प्राप्त मासिक आय में पशुओं के चारे और अन्य आवश्यक खर्चों को निकालने के बाद लगभग 15 हजार रुपये की बचत हो रही है। डेयरी व्यवसाय से उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है, जिससे परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिल रही है। खेती के साथ पशुपालन अपनाने से उनकी आय के स्रोतों में विविधता आई है। मनोज की सफलता यह दर्शाती है कि शासन की योजनाओं का लाभ लेकर ग्रामीण युवा और किसान स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से स्वरोजगार के अवसर विकसित कर सकते हैं।
डेयरी व्यवसाय की विशेषता यह है कि इससे ग्रामीण परिवारों को केवल मौसमी कृषि आय पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। दूध उत्पादन और बिक्री से नियमित नकद आय प्राप्त होती है, जिसका उपयोग परिवार की दैनिक जरूरतों, बच्चों की शिक्षा और अन्य आवश्यक कार्यों में किया जा सकता है। पशुपालन आधारित ऐसी गतिविधियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ स्वरोजगार को भी प्रोत्साहित कर रही हैं।
आजीविका डबरी से फूना राम पहाड़ी कोरवा को मिला मछली पालन का अवसर
ग्रामीण विकास में जल संरक्षण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्षा जल का संचयन केवल सिंचाई की सुविधा उपलब्ध नहीं कराता, बल्कि खेती के साथ मछली पालन जैसी अतिरिक्त आजीविका गतिविधियों का आधार भी बन सकता है। सरगुजा जिले के ग्रामीण अंचल में रहने वाले फूना राम पहाड़ी कोरवा के लिए आजीविका डबरी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई है। ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत उनकी खाली पड़ी जमीन पर आजीविका डबरी का निर्माण किया गया, जिससे वर्षा जल के संग्रहण और उसके उपयोग की सुविधा विकसित हुई।
डबरी में संचित पानी से फूना राम को मछली पालन शुरू करने का अवसर मिला है। पहले अनुपयोगी पड़ी भूमि अब परिवार के लिए आजीविका की संभावनाएं पैदा कर रही है। मछली पालन से भविष्य में अतिरिक्त आय अर्जित करने का मार्ग खुला है। विशेष रूप से ग्रामीण और जनजातीय परिवारों के लिए इस प्रकार की जल आधारित परिसंपत्तियां स्थानीय संसाधनों के उपयोग से आर्थिक गतिविधियां विकसित करने में सहायक हो सकती हैं।
इसी प्रकार बाबूनाथ के खेत में डबरी के गहरीकरण से जल संग्रहण क्षमता और सिंचाई सुविधा में सुधार हुआ है। पानी की उपलब्धता बढ़ने से उन्हें सब्जी उत्पादन में सहायता मिली है, वहीं मछली पालन की संभावनाएं भी विकसित हुई हैं। डबरी के माध्यम से जल संरक्षण, सिंचाई, सब्जी उत्पादन और मत्स्य पालन को एक साथ जोड़ने से ग्रामीण परिवारों को आजीविका के एक से अधिक साधन विकसित करने का अवसर मिल रहा है।
इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि जल संरक्षण के कार्यों को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने पर उनका लाभ और व्यापक हो सकता है। वर्षा जल का बेहतर प्रबंधन कृषि उत्पादन बढ़ाने, अतिरिक्त फसलों की खेती और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में उपयोगी है। इससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
57.83 लाख रुपये से सड़क का नवीनीकरण, ग्रामीणों के लिए आवागमन हुआ सुगम
ग्रामीण विकास में बेहतर सड़क संपर्क का विशेष महत्व है। सड़कें केवल गांवों को एक-दूसरे से नहीं जोड़तीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार के अवसरों तक पहुंचने का माध्यम भी बनती हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सरगुजा जिले में अम्बिकापुर-दरिमा-मैनपाट मार्ग से मानिक प्रकाशपुर तक 3.85 किलोमीटर लंबी सड़क का नवीनीकरण 57.83 लाख रुपये की लागत से पूर्ण किया गया है। इस कार्य से क्षेत्र के ग्रामीणों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिली है।
सड़क का नवीनीकरण होने से किसानों को अपनी कृषि उपज बाजार तक पहुंचाने, विद्यार्थियों को शिक्षण संस्थानों तक आने-जाने और ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं सहित दैनिक आवश्यकताओं के लिए आवागमन में सुविधा हो रही है। बेहतर सड़क संपर्क से परिवहन व्यवस्था सुगम होने के साथ आसपास के गांवों के बीच सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलता है।
ग्रामीण सड़कों का विकास स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किसानों को बाजार तक पहुंचने में सुविधा मिलने से कृषि उपज के विपणन के अवसर बढ़ते हैं। इसी प्रकार बेहतर संपर्क व्यवस्था ग्रामीण परिवारों को आवश्यक सेवाओं और रोजगार के अवसरों से जोड़ने में सहायक होती है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत किए जा रहे ऐसे कार्य गांवों के समग्र विकास की मजबूत आधारशिला तैयार कर रहे हैं।
आर्थिक सुरक्षा, स्वरोजगार और अधोसंरचना विकास से सशक्त हो रहा ग्रामीण जीवन
सरगुजा जिले में जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से सामने आ रहे ये उदाहरण ग्रामीण विकास की व्यापक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। एक ओर नोनी सुरक्षा योजना से आंचल जैसी बेटियों के भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा का आधार तैयार हो रहा है, तो दूसरी ओर मनोज कुमार पटेल जैसे ग्रामीण डेयरी व्यवसाय को नियमित आय का साधन बनाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। फूना राम पहाड़ी कोरवा और बाबूनाथ जैसे हितग्राहियों के लिए आजीविका डबरी जल संरक्षण के साथ खेती और मछली पालन के नए अवसर उपलब्ध करा रही है। वहीं बेहतर सड़क संपर्क ग्रामीण परिवारों के लिए बाजार और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान बना रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उद्देश्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के साथ ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। कृषि के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण अधोसंरचना का विस्तार करने से स्थानीय स्तर पर आजीविका की नई संभावनाएं विकसित हो रही हैं।
सरगुजा की ये कहानियां बताती हैं कि विकास का वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देता है, जब योजनाएं लोगों के जीवन में सुविधाओं के साथ आत्मविश्वास और आगे बढ़ने के अवसर भी लेकर आती हैं। बेटी के भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा, परिवार के लिए नियमित आय, खेतों में जल संरक्षण और गांवों तक बेहतर सड़क संपर्क जैसे बदलाव ग्रामीण समृद्धि की मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं। शासन की योजनाओं और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से सरगुजा आत्मनिर्भरता, आर्थिक सशक्तीकरण और समग्र ग्रामीण विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

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