September 18, 2026

करमवीर भारत

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संजू सैमसन ने अफगानिस्तान सीरीज में दिया करारा जवाब, 117 रन और 180 का स्ट्राइक रेट

 

नई दिल्ली
अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे टी20 में अभिषेक शर्मा ने 30 गेंदों में शतक ठोककर खूब सुर्खियां बटोरीं, लेकिन इसी सीरीज में संजू सैमसन ने भी चुपचाप अपना जवाब दे दिया. इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे पर लगातार नाकामी के बाद टीम से बाहर हुए संजू ने अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों में 117 रन बनाए, जिसमें दो अर्धशतक शामिल रहे. उनका स्ट्राइक रेट 180 रहा.

गंभीर ने कहा कि इंग्लैंड में संजू को बाहर रखना उनके कोचिंग कार्यकाल का सबसे मुश्किल फैसला था. उन्होंने माना कि वर्ल्ड कप जीतने से पहले संजू के प्रदर्शन को देखते हुए यह फैसला आसान नहीं था. हालांकि, गंभीर ने यह भी कहा कि कई बार टीम मैनेजमेंट को खिलाड़ियों की मौजूदा फॉर्म के आधार पर फैसला लेना पड़ता है.

गंभीर के मुताबिक टी20 क्रिकेट में सिर्फ रन या विकेट नहीं देखे जाते, बल्कि खिलाड़ी और टीम कितना इम्पैक्ट डाल रहे हैं, यह ज्यादा अहम है.

इसी वजह से उन्होंने अभिषेक के 100 रन से ज्यादा टीम के पावरप्ले में 100 रन पूरे करने को बड़ी उपलब्धि बताया. उनके कोचिंग कार्यकाल में भारत ने पहली बार पावरप्ले में 100 रन बनाए. गंभीर ने कहा कि टीम को इसी आक्रामक सोच के साथ आगे बढ़ना है और अब अगला लक्ष्य 300 रन का स्कोर है.

वर्ल्ड कप वाली टीम पर भरोसा क्यों?
संजू के मामले में गंभीर ने एक और बात साफ की. उनका कहना था कि टीम मैनेजमेंट शुरू से ही वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के कॉम्बिनेशन पर वापस जाने को लेकर स्पष्ट था.

गंभीर ने कहा कि कोई खिलाड़ी दो-तीन मैच या एक-दो सीरीज में नाकाम होने से खराब खिलाड़ी नहीं बन जाता. भारत एक वर्ल्ड कप से दूसरे वर्ल्ड कप तक अजेय रहा और वर्ल्ड कप जीता. ऐसे में सिर्फ दो-तीन नाकामियों के बाद उस टीम या उसके खिलाड़ियों पर भरोसा खत्म नहीं किया जा सकता.

संजू आए तो वैभव को करना पड़ा इंतजार
अफगानिस्तान सीरीज में संजू की वापसी का सीधा असर 15 साल के वैभव सूर्यवंशी पर पड़ा. वैभव को प्लेइंग इलेवन से बाहर होना पड़ा. गंभीर ने इसे वैभव के लिए झटका नहीं, बल्कि इंतजार का हिस्सा बताया. उन्होंने कहा कि टीम मैनेजमेंट को वैभव की प्रतिभा और वह क्या कर सकता है, इसकी पूरी जानकारी है. लेकिन जो खिलाड़ी करीब दो साल से लगातार अच्छा कर रहा है, वह उस खिलाड़ी से आगे रहेगा जो अभी टीम में आया है.

उनका संदेश साफ था- चाहे खिलाड़ी 15 साल का हो या 30 साल का, अगर मौका मिलने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है तो इंतजार करना होगा. भारतीय क्रिकेट में यही प्रतियोगिता है और टीम के ड्रेसिंग रूम में इस तरह की प्रतिभाओं की मौजूदगी ही टीम को मजबूत बनाती है.