इंदौर
देश भर में तेजी से ओरल कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं. ऐसे में समय रहते बीमारियों की जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस काफी मददगार साबित हो रहा है. रोबोट डिवाइस मुंह से जुड़ी बीमारियों और खासतौर पर कैंसर का पता आसानी से और समय रहते लगा रहा है, जिससे मरीज को बीमारी के गंभीर होने से पहले इलाज मिल सकेगा।
हर साल कैंसर की चपेट में आ रहे हजारों लोग
भारत में धूम्रपान की लत के अलावा, तंबाकू का सेवन और तरह-तरह के जानलेवा शौक से कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं. हर साल हजारों मरीज डायग्नोज हो रहे हैं, इनमें से अधिकांश थर्ड और फोर्थ स्टेज कंडीशन में होते हैं. इसलिए इनमें से हर साल 50 हजार लोगों की इलाज के बावजूद बीमारी फैलने के कारण मौत हो जाती है. हॉस्पिटल और ऑन्कोलॉजिस्ट वाले कैंसर सहित कई अन्य गंभीर बीमारियों को प्री स्टेज में पता करने के लिए स्कैन ओ एयर नामक रोबोटिक मशीन का उपयोग कर रहे हैं. यह मशीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए बीमारी का 96% तक पता लगाने में सक्षम है।
फ्री में होगी जांच
इंदौर स्थित एक निजी अस्पताल में पहली बार यह मशीन स्थपित किया गया है. जहां मुंह की किसी भी समस्या का निशुल्क जांच किया जा रहा है. जांच के बाद फौरन रिपोर्ट मरीज के मोबाइल नंबर में आ जाता है. अस्पताल के ऑन्कोलॉजिस्ट अमय बियानी ने कहा, "अधिकांश मरीजों को यह पता नहीं होता कि उनके मुंह की छोटी सी तकलीफ कभी भी कैंसर का रूप ले सकती है. अस्पताल में किसी भी तरह की तकलीफ में आने वाले लोग अपने मुंह की प्री मेलेनिन स्टेज में ही जांच कर सकें. इसलिए यह रोबोटिक मशीन स्थापित की गई है।
ओरल कैंसर के लिए क्रांतिकारी साबित
इस रोबोटिक मशीन की खोज साल 2020 में पुणे की डेंटिस्ट विधि भानुशाली और रजत कबाड़े ने किया था, इसका उद्देश्य दांतों और मसूड़े की 40 तरह की बीमारियों की पहचान के लिए किया गया था. इस रोबोटिक मशीन से तरह-तरह की मुंह की जांच के अलावा, कैंसर की प्री स्टेज से संबंधित बीमारी और स्थितियां भी डायग्नोज होने लगी हैं, जिससे यह मशीन ओरल कैंसर के डायग्नोज के लिए क्रांतिकारी साबित हो रही है।
मेडिकल प्रोफेशनल के लिए सहायक
कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतिभा पवार ने कहा, "रोबोटिक मशीन की जांच रिपोर्ट से काफी हद तक मरीज की बीमारी का पता चल जाता है. जिससे यह डॉक्टर और मेडिकल प्रोफेशनल के लिए भी सहायक सिद्ध होगी. मशीन की जांच रिपोर्ट के बाद सिर्फ उन मरीजों को सीटी स्कैन अथवा बायोप्सी करनी जरूरी होगी. जिनका डायग्नोज मशीन द्वारा ओरल कैंसर के रूप में किया गया है इससे लोगों को अनावश्यक जांच के खतरे और आर्थिक समस्या से बचाव हो सकेगा।

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