ग्वालियर
कलेक्टर ग्वालियर रुचिका सिंह चौहान के निर्देशन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एम एस सागर के नेतृत्व में ग्वालियर जिला दिन प्रतिदिन बेहतर कार्य कर रहा है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला ग्वालियर डॉक्टर डॉ.एम.एस. सागर ने बताया कि राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा बैठक इंदौर में दिनांक 19 एवं 20 अगस्त 2026 को समीक्षा सह क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के केंद्रीय लेप्रोसी डिविजन के महानिदेशक डायरेक्टर जनरल ऑफ़ लेप्रोसी डॉक्टर सुनील व्ही.गीते द्वारा ग्वालियर जिले के डॉक्टर प्रबल प्रताप सिंह एवं जिला कुष्ठ सलाहकार डॉ वीरेंद्र नोडिया को स्पोट लेप्रोसी सर्वे एक इन्नोवेटिव कार्यक्रम के लिए राज्य में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया, साथ ही ग्वालियर की पूरी कुष्ठ टीम को बधाई दी गई इस मौके पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के राष्ट्रीय सलाहकार डॉ.रश्मि शुक्ला, आर.एल.टी.आर. आई. रायपुर के निर्देश डॉ. संदीप जोगडंड, डॉ.व्ही. शांताराम सी.एम.ओ.आर.एल. टी.आर. आई.रायपुर एवं राज्य कुष्ट अधिकारी डॉ. निधि शर्मा एवं राज्य कुष्ठ सलाहकार डॉ. सुभाष पांडे आदि मौजूद रहे, उक्त उपलब्धि पर सीएमएचओ डॉ एम एस सागर ने दोनों अधिकारियों के साथ स्वास्थ्य विभाग के सभी कर्मचारियों को बधाई दी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कुष्ठ रोग नियंत्रण के उपायों को मजबूत करने और इसके फैलने की प्रक्रिया को रोकने में तेज़ी लाने के लिए राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम समीक्षा और क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया।
इस कार्यशाला में स्वास्थ्य अधिकारियों और तकनीकी सहयोगियों को एक साथ लाया गया ताकि कुष्ठ रोग के प्रसार को रोकने के लिए शुरुआती पहचान, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और अंतिम छोर तक पहुँचने के प्रयासों को मजबूत किया जा सके।
राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत ज़िला-स्तरीय अनुभव साझा करने और आपसी सीख से शुरुआती पहचान, समय पर इलाज और सामुदायिक भागीदारी को मजबूती मिलती है।
चर्चाओं का मुख्य केंद्र महामारी विज्ञान की स्थिति की समीक्षा, कार्यक्रम के प्रदर्शन का आकलन, कार्यान्वयन में कमियों की पहचान और ज़मीनी स्तर के अनुभवों व सर्वोत्तम तरीकों को साझा करना था। कुष्ठ रोग के प्रसार को रोकने की 'अंतिम छोर तक पहुँचने' (last-mile) की रणनीति के मुख्य घटकों के रूप में शुरुआती पहचान, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, समय पर इलाज शुरू करने और पूरा करने, विकलांगता की रोकथाम और गहन निगरानी को मजबूत करने पर विशेष ज़ोर दिया गया।

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