August 11, 2026

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रहाणे के संन्यास पर आया सचिन का पहला फोन, विराट-रोहित समेत इन खिलाड़ियों ने भेजे मैसेज

 

अजिंक्य रहाणे ने अपने क्रिकेट करियर को अलविदा कहने के फैसले पर किसी तरह का पछतावा नहीं जताया है. भारत के इस अनुभवी बल्लेबाज ने कहा कि उन्होंने यह फैसला काफी सोच-समझकर लिया और उन्हें इस बात की पूरी संतुष्टि है कि उन्होंने खेल को अपना सबकुछ दिया. संन्यास की घोषणा के बाद उनके कई पूर्व भारतीय साथियों ने उनसे संपर्क भी किया.

रहाणे ने बताया कि संन्यास का ऐलान करने के बाद उन्हें सबसे पहले महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का फोन आया था. सचिन ने रहाणे से कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि वह अभी और लंबे समय तक क्रिकेट खेलेंगे.

रहाणे ने कहा कि उन्होंने सचिन को साफ बताया कि वह अपने करियर को अनावश्यक रूप से खींचना नहीं चाहते थे. उनका मानना था कि जब उन्होंने मैदान पर अपना पूरा योगदान दे दिया है और मन में कोई पछतावा नहीं है, तो यही सही समय था.

रहाणे ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' से बातचीत में कहा- सबसे पहला फोन सचिन पाजी का आया. उन्होंने कहा कि उन्हें लगा था कि मैं और खेलूंगा. मैंने उनसे कहा कि मैं इसे खींचना नहीं चाहता था, क्योंकि मैं बिना किसी पछतावे के संन्यास ले रहा हूं.

विराट-रोहित समेत इन खिलाड़ियों ने भेजा मैसेज
सिर्फ सचिन ही नहीं, रहाणे के कई पुराने साथियों ने भी उनके संन्यास के बाद उनसे संपर्क किया. इरफान पठान ने उन्हें फोन किया, जबकि चेतेश्वर पुजारा, विराट कोहली, रोहित शर्मा और जसप्रीत बुमराह ने मैसेज के जरिए रहाणे से बात की.

रहाणे ने कहा कि इन सभी के सामने उनका जवाब एक जैसा था. उन्होंने बताया कि वह अपने करियर को लेकर संतुष्ट हैं, क्योंकि उन्होंने खेल के लिए पूरी ईमानदारी से मेहनत की और अपना सबकुछ दिया.

उन्होंने कहा- इरफान पठान ने भी फोन किया. पुजारा, विराट, रोहित और बुमराह ने मुझे मैसेज किया. मैंने सभी से एक ही बात कही कि मैं संतुष्ट हूं, क्योंकि मैंने खेल को अपना सबकुछ दिया.

2011 में टीम इंडिया में आए तो सिर्फ सीनियर्स को देखते थे रहाणे
रहाणे ने भारतीय टीम में अपने शुरुआती दिनों को भी याद किया. वह 2011 में टीम इंडिया का हिस्सा बने थे. उन्होंने बताया कि करियर के शुरुआती पांच-छह महीनों में वह ज्यादा समय टीम के सीनियर खिलाड़ियों को देखते हुए सीखते थे.

उस समय भारतीय ड्रेसिंग रूम में सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, एमएस धोनी और वीरेंद्र सहवाग जैसे बड़े नाम मौजूद थे. रहाणे के मुताबिक इन सभी खिलाड़ियों ने उनका काफी सपोर्ट किया.

उन्होंने बताया कि उस दौर में नेट्स में बल्लेबाजी का पर्याप्त समय मुख्य रूप से प्लेइंग इलेवन में शामिल खिलाड़ियों को ही मिलता था. जो खिलाड़ी प्लेइंग 11 से बाहर होते थे, उन्हें नेट्स में ज्यादा बल्लेबाजी करने का मौका नहीं मिलता था. ऐसे में रहाणे ने सीनियर खिलाड़ियों को देखकर बहुत कुछ सीखा और बाद में जब उन्हें खेलने का मौका मिला, तो उन्हीं चीजों को अपने खेल में उतारा.

रहाणे ने कहा कि 2011 में टीम में आने के बाद शुरुआती पांच-छह महीनों में उन्होंने सीनियर्स को देखकर बहुत कुछ सीखा. सचिन, द्रविड़, लक्ष्मण, धोनी और सहवाग सभी उनके लिए काफी मददगार रहे.

सीनियर्स के जाने के बाद बदला ड्रेसिंग रूम का माहौल
रहाणे ने भारतीय टीम के बदलते दौर को भी करीब से देखा. उनके मुताबिक जैसे-जैसे पुराने सीनियर खिलाड़ी टीम से बाहर होते गए, वैसे-वैसे ड्रेसिंग रूम का माहौल भी बदलने लगा.

उनका कहना था कि एक समय टीम में कई ऐसे खिलाड़ी थे, जो पहले से एक-दूसरे के साथ खेल चुके थे. इस वजह से खिलाड़ियों के बीच आपसी जुड़ाव और साथ होने की भावना अलग थी. टीम के खिलाड़ियों की सोच भी काफी हद तक एक जैसी थी.

रहाणे ने बताया कि उस दौर में टीम आक्रामक क्रिकेट खेलकर ज्यादा मैच जीतने की कोशिश करती थी.

रहाणे की सोच कैसे बदली
इसके बाद जब भारतीय टीम में नई पीढ़ी के खिलाड़ी आने लगे, तो रहाणे और उनके साथियों ने ड्रेसिंग रूम को लेकर एक अलग सोच अपनाई. उनका जोर ऐसा माहौल बनाने पर था, जहां युवा खिलाड़ियों को सहज महसूस हो और उनकी अच्छी पारियों और प्रदर्शन की खुलकर सराहना की जाए.

रहाणे ने कहा कि नए दौर में टीम का उद्देश्य ऐसा ड्रेसिंग रूम तैयार करना था, जहां खिलाड़ियों के बीच किसी तरह का अहंकार या जलन की जगह न हो. वह चाहते थे कि हर खिलाड़ी दूसरे के प्रदर्शन की तारीफ करे और टीम के भीतर एकजुटता बनी रहे.

85 टेस्ट समेत ऐसा रहा रहाणे का इंटरनेशनल करियर
अजिंक्य रहाणे ने 2011 से 2023 के बीच भारत के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेला. इस दौरान उन्होंने 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले.

अपने करियर के दौरान रहाणे अपनी तकनीक, धैर्य और मुश्किल परिस्थितियों में मानसिक मजबूती के लिए पहचाने गए. अब क्रिकेट से विदाई के बाद उन्होंने साफ कर दिया है कि अपने फैसले को लेकर उनके मन में कोई पछतावा नहीं है. उनके मुताबिक वह इस संतुष्टि के साथ खेल से दूर हुए हैं कि उन्होंने टीम और खेल के लिए अपना पूरा योगदान दिया.

रहाणे का टेस्ट करियर
• 85 मैच, 5077 रन, 38.46 औसत
• 12 शतक, 26 अर्धशतक, 49.50 स्ट्राइक रेट
• 578 चौके, 35 छक्के

रहाणे का ODI करियर
• 90 मैच, 2962 रन, 35.26 औसत
• 3 शतक, 24 अर्धशतक, 78.63 स्ट्राइक रेट
• 293 चौके, 33 छक्के

रहाणे का टी20I करियर
• 20 मैच, 375 रन, 20.83 औसत
• 1 अर्धशतक, 113.29 स्ट्राइक रेट
• 32 चौके, 6 छक्के