भोपाल
11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक और ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह (CWG) के सम्मेलनों का भोपाल में सफल समापन हो चुका है। 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' की शाश्वत भारतीय भावना और भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की मुख्य थीम "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) के संकल्प के साथ आयोजित इस तीन दिवसीय वैश्विक समागम ने अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति और सांस्कृतिक सहयोग का एक नया इतिहास रच दिया है। कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में संपन्न हुए इस बहुपक्षीय सम्मेलन ने साबित किया कि जब वैश्विक स्तर पर संस्कृति, परंपरा और रचनात्मकता आपस में जुड़ती हैं, तो वे भौगोलिक सीमाओं से परे शांति, परस्पर सम्मान और समावेशी विकास का एक स्थायी ढांचा तैयार करती हैं।
इस ऐतिहासिक आयोजन की पूर्व संध्या से लेकर समापन तक, भोपाल की धरा पर वैश्विक सहयोग का एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। सम्मेलन में भारत सहित कुल 14 देशों के 55 उच्चस्तरीय प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें 10 ब्रिक्स सदस्य देश—ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के साथ चार साझेदार देश बेलारूस, क्यूबा, कजाकिस्तान और थाईलैंड शामिल हुए। सम्मेलन की भव्यता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के संस्कृति मंत्रियों ने स्वयं भोपाल पहुंचकर इस विचार-विमर्श का नेतृत्व किया, जबकि मिस्र के संस्कृति मंत्री ने ऑनलाइन माध्यम से अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
यह आयोजन भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत संस्कृति क्षेत्र के अंतर्गत अपनाई गई एक अत्यंत सुव्यवस्थित और चरणबद्ध प्रक्रिया की ऐतिहासिक परिणति रहा। इस यात्रा की शुरुआत 29–30 अप्रैल 2026 को वर्चुअल माध्यम से आयोजित पहली ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की बैठक से हुई थी। इसके पश्चात 4–5 जून को सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में दूसरी कार्य समूह की बैठक आयोजित हुई, जिसमें नीतिगत प्राथमिकताओं का खाका खींचा गया। 5–6 अगस्त को भोपाल में संपन्न हुई तीसरी कार्य समूह की बैठक ने मंत्री-स्तरीय वार्ताओं का आधार तैयार किया। इन गहन और बहुस्तरीय विचार-विमर्शों का सफल समापन 8 अगस्त 2026 को 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक और सर्वसम्मति से 'भोपाल घोषणा पत्र' को अंगीकार किए जाने के साथ हुआ।
'साझा ब्रिक्स डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिलेगी सांस्कृतिक कलाकारों की रचनात्मक जानकारी
भोपाल सम्मेलन की दूरगामी और ऐतिहासिक सफलताओं में से एक भारत द्वारा प्रस्तुत 'स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री' का प्रस्ताव रहा, जिसे सभी सहभागी देशों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया। भारत द्वारा शुरू की गई यह पायलट पहल एक 'साझा ब्रिक्स डिजिटल प्लेटफॉर्म' के रूप में आकार लेगी। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को केवल सरकारी स्तर तक सीमित न रखकर, उन्हें सीधे कलाकारों, विचारकों, शिल्पकारों और रचनात्मक उद्यमियों से जोड़ने का एक मजबूत संस्थागत जरिया बनेगा।
इस एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार राष्ट्रों के कलाकारों की एक वृहद निर्देशिका (डायरेक्टरी) तैयार की जाएगी। साथ ही इस मंच पर सांस्कृतिक एवं रचनात्मक उद्योगों से जुड़ी नीतियां, दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण, ऐतिहासिक स्थापत्य विरासत की जानकारी और रचनात्मक पद्धतियों का साझा दस्तावेजीकरण उपलब्ध रहेगा।
यह पहल ब्रिक्स देशों के बीच ज्ञान, तकनीकी संसाधनों और उत्कृष्ट सांस्कृतिक प्रथाओं के त्वरित और पारदर्शी आदान-प्रदान को अभूतपूर्व गति देगी। इसके माध्यम से सदस्य देशों के कलाकार न केवल एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकेंगे, बल्कि डिजिटल साधनों का उपयोग करके वैश्विक बाजारों तक सीधी पहुंच भी प्राप्त करेंगे। यह व्यवस्था ब्रिक्स देशों के रचनात्मक क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करने, पेशेवर नेटवर्क को सुदृढ़ करने और वास्तविक अर्थों में जन-से-जन (People-to-People) संपर्क को गहरा करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध होगी।
विश्व धरोहर स्थल घोषित करने के लिए यूनेस्को में ब्रिक्स देश भेजेगा साझा नामांकन
वैश्विक सांस्कृतिक परिदृश्य पर अपनी साझी पहचान को सशक्त रूप से स्थापित करने के उद्देश्य से, सम्मेलन में भारत द्वारा रखे गए दूसरे प्रमुख प्रस्ताव पर भी ऐतिहासिक सहमति बनी। इसके तहत ब्रिक्स देश अब यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए अपनी साझा स्थापत्य, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं का संयुक्त या बहुराष्ट्रीय (Multinational) नामांकन दाखिल करेंगे।
यह पहल उन ऐतिहासिक और सभ्यतागत कड़ियों को वैश्विक मंच पर उजागर करेगी जो सदियों से सीमाओं के पार ब्रिक्स राष्ट्रों को आपस में जोड़ती रही हैं। संयुक्त नामांकन के इस सहयोगात्मक दृष्टिकोण से न केवल बहुपक्षीय सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूती मिलेगी, बल्कि परस्पर संबद्ध विरासतों के संरक्षण और प्रबंधन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी बढ़ेगा।
साझा धरोहरों के संरक्षण की इस भावना को आगे बढ़ाते हुए 'भोपाल घोषणा पत्र' में गैर-कानूनी रूप से हटाई गई या तस्करी की गई सांस्कृतिक संपदा के उद्गम-अनुसंधान और उनकी सुरक्षित वापसी व पुनर्स्थापन पर विशेष सहमति व्यक्त की गई है। इसके लिए आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित ट्रैकिंग टूल्स का उपयोग करने की संभावनाओं पर बल दिया गया है। इसके अलावा, पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों, पारम्परिक सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों की सुरक्षा और संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागारों के डिजिटलीकरण से दस्तावेजी विरासत को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करने का संकल्प लिया गया है।
ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन-2026 में अपनाया गया 'भोपाल घोषणा पत्र'
भोपाल में 8 अगस्त 2026 को अपनाया गया 'भोपाल घोषणा पत्र' (Bhopal Declaration) बहुपक्षीय वार्ताओं और गहन चर्चाओं का एक ठोस, व्यावहारिक और भविष्य-उन्मुख परिणाम है। यह घोषणा पत्र केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह आगामी वर्षों में ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग, विरासत संरक्षण, डिजिटल नवाचार और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को गति देने वाला एक सुस्पष्ट और रणनीतिक रोडमैप प्रस्तुत करता है।
घोषणा पत्र की प्रमुख प्राथमिकताओं में सांस्कृतिक एवं रचनात्मक उद्योगों को सतत विकास और आर्थिक समृद्धि का प्रमुख चालक मानना शामिल है। इसके माध्यम से ब्रिक्स देशों ने सांस्कृतिक नीतियों को आधुनिक अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इसमें कलाकारों के अधिकारों के संरक्षण और वर्तमान डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। विशेष रूप से, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रणालियों में कॉपीराइट संरक्षित कृतियों के उपयोग में पूर्ण पारदर्शिता बरतने और रचनाकारों को उनके बौद्धिक श्रम का उचित और न्यायसंगत पारिश्रमिक दिलाना इस घोषणा पत्र का एक प्रमुख बिंदु है।
यह ऐतिहासिक दस्तावेज ब्रिक्स देशों के प्रमुख सांस्कृतिक संस्थानों—संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागारों—के बीच सीधी साझेदारी और विशेषज्ञता साझा करने का एक स्थायी ढांचा तैयार करता है। 'भोपाल घोषणा पत्र' ने यह स्पष्ट किया है कि ब्रिक्स देशों का सांस्कृतिक एजेंडा अब आवधिक बैठकों से आगे बढ़कर परिणाम-उन्मुख और संस्थागत सहयोग की ओर मजबूती से बढ़ चुका है।
मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थल और सांस्कृतिक विरासत को देख अभिभूत हुए ब्रिक्स प्रतिनिधिमंडल, साझा किए अपने अनुभव
अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के औपचारिक सत्रों के साथ ब्रिक्स प्रतिनिधिमंडलों के लिए सांस्कृतिक भ्रमण और आतिथ्य कार्यक्रम इस आयोजन का एक बेहद जीवंत और यादगार अध्याय रहा। प्रतिनिधियों ने भोपाल स्थिति इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का भ्रमण कर भारत की समृद्ध जनजातीय, लोक जीवन और सभ्यतागत यात्रा का अवलोकन किया। इसके उपरांत भोपाल की ऐतिहासिक हेरिटेज वॉक के दौरान प्रतिनिधियों ने गौहर महल, इकबाल मैदान और मोती मस्जिद के अद्वितीय वास्तुशिल्प को निहारा और वन विहार की समृद्ध जैव-विविधता एवं बड़ा तालाब में शिकारा सैर का अविस्मरणीय आनंद लिया।
प्रतिनिधिमंडल के लिए यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों सांची और भीमबेटका का भ्रमण ज्ञानवर्धक और अद्भुत रहा। केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के नेतृत्व में 42 सदस्यीय दल ने सांची के महान बौद्ध स्तूपों, तोरण द्वारों पर उकेरी गई प्राकृत संरचना और संग्रहालय का गहनता से अवलोकन किया। संध्या समय प्रतिनिधियों ने भव्य लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से भगवान बुद्ध के जीवन-दर्शन और शांति व करुणा के संदेश को प्रत्यक्ष महसूस किया। वहीं, 9 अगस्त को प्रतिनिधियों ने यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भीमबेटका के प्रागैतिहासिक शैलाश्रयों की यात्रा की। दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, रूस, चीन सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने हजारों वर्ष पुराने प्रागैतिहासिक शैलचित्रों को देखकर मानव सभ्यता के क्रमिक विकास और प्रारंभिक मानव जीवन के दुर्लभ प्रमाणों का साक्षात्कार किया।
मध्यप्रदेश की कालजयी विरासत और आतिथ्य से अभिभूत होकर ब्रिक्स प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए:
फदली ज़ोन (संस्कृति मंत्री, इंडोनेशिया) ने सांची के विशाल स्तूपों और भीमबेटका के प्राचीन शैलचित्रों के अपने अनुभव को विस्मयकारी और अत्यंत समृद्ध बताया।
जुआन कार्लोस मार्सन (राजदूत, क्यूबा) ने 'भोपाल घोषणा पत्र' को वैश्विक सांस्कृतिक संबंधों के क्षेत्र में एक मील का पत्थर बताते हुए कहा कि सांची और भीमबेटका की विरासत संपूर्ण मानवता के लिए एक अमूल्य धरोहर है।
डॉ. ओमिद बाबेलियन (ईरान दूतावास) ने भोपाल के झीलों के सौंदर्य, बेगमों के ऐतिहासिक स्थापत्य, सांची के शांति संदेश और वर्षा की फुहारों के बीच भीमबेटका के शैलचित्रों के इस सुंदर दौरे के लिए मध्यप्रदेश सरकार और यहाँ के निवासियों का हृदय से आभार प्रकट किया।
लुकास गोडॉय विलेयला बारबोसा (सहायक, आर्थिक शासन प्रभाग, विदेश मंत्रालय, ब्राजील) ने कहा कि भीमबेटका के शैलाश्रयों को प्रत्यक्ष देखना एक अद्वितीय अनुभव रहा, जहाँ यह स्पष्ट दिखता है कि मानव सभ्यता और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों की निरंतरता कितनी गहरी और प्राचीन रही है।
सु क्लिऑन नोआह (निदेशक, बहुपक्षीय एवं संसाधन विभाग, दक्षिण अफ्रीका) ने भोपाल के लोगों के मित्रवत व्यवहार, आतिथ्य और लजीज व्यंजनों की भरपूर सराहना की। उन्होंने सांची के बौद्ध स्तूपों और भीमबेटका के प्राचीन चित्रों को देखना अपनी जीवन यात्रा का एक बेहद महत्वपूर्ण और यादगार क्षण बताया।
इस ऐतिहासिक अवसर पर मध्यप्रदेश सरकार की ओर से प्रतिनिधियों को अद्वितीय आतिथ्य प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 8 अगस्त को कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में दोपहर के भोजन और सांची में रात्रिभोज का आयोजन किया गया। इन अवसरों ने प्रतिनिधियों के बीच अनौपचारिक बातचीत, सौहार्द और व्यक्तिगत मित्रता के नए तार जोड़े। सम्मेलन के समानांतर केंद्रीय संस्कृति मंत्री तथा संस्कृति सचिव स्तर पर विभिन्न प्रतिभागी देशों के साथ कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें भी हुईं, जिनमें परस्पर सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ाने पर सार्थक सहमति बनी।
ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव रहा अद्भुत तो 'प्रोजेक्ट मौसम', 'बृहत्तर भारत' और 'ज्ञान भारतम्' प्रदर्शनियां बनीं आकर्षण का केंद्र
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के अंतर्गत, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 6–7 अगस्त 2026 को भोपाल के ऐतिहासिक रवींद्र भवन में दो दिवसीय भव्य 'ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव' का आयोजन किया गया। इस महोत्सव ने विभिन्न प्रतिभागी देशों की सांगीतिक और कलात्मक विधाओं के माध्यम से वैश्विक विविधता में एकता का एक अद्वितीय दृश्य प्रस्तुत किया।
महोत्सव में बेलारूस, ब्राजील, इंडोनेशिया, रूस और संयुक्त अरब अमीरात के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक लोक एवं शास्त्रीय प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मुग्ध कर दिया। भारत की ओर से राजस्थान की विश्व प्रसिद्ध लोक नृत्य प्रस्तुति 'मारू के रंग' का मंचन किया गया, जिसने भारत के जीवंत लोक रंगों को वैश्विक मंच पर बिखेर दिया।
महोत्सव का सबसे भावुक और भव्य क्षण 'ब्रिक्स पीस सॉन्ग' की सामूहिक प्रस्तुति रही। इसमें प्रतिभागी देशों के कलाकारों ने अपनी-अपनी राष्ट्रीय भाषाओं में भारतीय लोकाचार के अमर मंत्र 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' का समवेत गायन किया। वहीं भारतीय गान-वृंद ने संबंधित देशों की भाषाओं में इस शांति मंत्र को दोहराकर सांस्कृतिक संवाद की एक अद्भुत मिसाल कायम की।
मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा निर्मित 35 मिनट की भव्य नृत्य-नाट्य प्रस्तुति 'अमृतस्य मध्यप्रदेश: भारत के हृदय की एक नृत्य-नाट्य यात्रा' इस सांस्कृतिक महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण रही। 125 से अधिक कुशल कलाकारों द्वारा शास्त्रीय, लोक और जनजातीय नृत्य शैलियों के संगम से तैयार की गई इस प्रस्तुति ने राज्य की प्रागैतिहासिक काल से लेकर आधुनिक युग तक की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा को जीवंत कर दिया। इसमें 'ओंकार – सृष्टि की शुरुआत', महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, राजा भोज की नगरी, मां नर्मदा की पावन धारा तथा आगामी सिंहस्थ महाकुंभ-2028 की सांस्कृतिक चेतना को उन्नत कोरियोग्राफी और इमर्सिव मल्टीमीडिया तकनीकों के साथ प्रस्तुत किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ, सम्मेलन स्थल कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर और मिंटो हॉल परिसर में भारत की सभ्यतागत विरासत और वैश्विक संपर्कों को उजागर करने वाली तीन विशेष प्रदर्शनियां आयोजित की गईं, जो आगंतुकों और प्रतिनिधियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।
प्रोजेक्ट मौसम (Project Mausam): इस प्रदर्शनी ने हिंद महासागर के समुद्री मार्गों के माध्यम से भारत के प्राचीन व्यापारिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संपर्कों को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया।
बृहत्तर भारत (Greater India): इसने दक्षिण-पूर्व एशिया और विश्व के विभिन्न हिस्सों में भारतीय कला, स्थापत्य, दर्शन और संस्कृति के ऐतिहासिक प्रभाव और प्रसार को रेखांकित किया।
ज्ञान भारतम् (Gyan Bharatam): इस प्रदर्शनी ने भारत की प्राचीन पांडुलिपियों, वैज्ञानिक खोजों, खगोलशास्त्र और सदियों पुरानी मौखिक ज्ञान परंपराओं का एक विस्तृत परिदृश्य प्रस्तुत किया।
इन तीनों प्रदर्शनियों ने ब्रिक्स प्रतिनिधियों को यह समझने का गहरा अवसर दिया कि भारत की संस्कृति सदैव से ज्ञान, शांति और वैश्विक कल्याण की पक्षधर रही है।
भोपाल की धरा से "सर्वे भवन्तु सुखिनः" का वैश्विक संदेश
भोपाल में संपन्न हुए 11वें ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों के इस ऐतिहासिक समागम ने यह स्पष्ट किया है कि सांस्कृतिक कूटनीति अब केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को नई गहराई और स्थिरता देने वाला एक सशक्त माध्यम बन चुकी है।
अप्रैल 2026 में वर्चुअल वार्ताओं से प्रारंभ होकर, जून में वाराणसी के आध्यात्मिक क्षितिज से गुजरती हुई, अगस्त में भोपाल की ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरा पर 'भोपाल घोषणा पत्र' के रूप में संपन्न हुई यह यात्रा बहुपक्षीय सहयोग की एक मिसाल बन गई है। 'स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री' जैसा संस्थागत ढांचा, यूनेस्को का साझा एजेंडा, AI और डिजिटल तकनीक का न्यायसंगत उपयोग तथा उच्चस्तरीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान इस बात के प्रमाण हैं कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स संस्कृति ट्रैक ने नीतिगत और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर दूरगामी परिणाम हासिल किए हैं।
भोपाल सम्मेलन ने न केवल मध्यप्रदेश की समृद्ध पर्यटन और ऐतिहासिक धरोहर को दुनिया के मानचित्र पर नई चमक दी है, बल्कि 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' के अमर संदेश को संपूर्ण विश्व में प्रसारित कर वैश्विक शांति, पारस्पारिक सम्मान और साझी संस्कृति का एक मजबूत रोडमैप प्रस्तुत किया है।

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