भोपाल
आज आपातकाल की 51वीं बरसी है. भारतीय जनता पार्टी इस दिन को संविधान हत्या दिवस के रुप में मनाती है. आज प्रदेशभर में लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान, संगोष्ठियों की प्रदर्शनी, व्याख्यान, छात्र युवा कार्यक्रम और जन जागरूकता गतिविधियां बीजेपी की ओर से आयोजित की जा रही हैं। आपातकाल दिवस के अवसर पर गुरुवार को राजधानी भोपाल के रवीन्द्र भवन में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले मीसाबंदियों और उनके परिजनों का सम्मान करेंगे। समारोह में लोकतंत्र सेनानी संघ के पदाधिकारी, विभिन्न जिलों से आए मीसाबंदी परिवारों के सदस्य और बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहेंगे। आयोजकों के अनुसार करीब दो हजार परिवार इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंच से लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित कर उनके योगदान को याद करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और उन लोगों के प्रति सम्मान प्रकट करना है जिन्होंने उस दौर में कठिन परिस्थितियों का सामना किया।
इंदिरा सरकार के अहंकार ने आपातकाल लगाया- सीएम
इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 25 जून, 1975… देश में लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला दिन, जब इंदिरा सरकार के अहंकार ने आपातकाल लगाया। इस विभीषिका के विरुद्ध डटकर खड़े होने वाले लोकतंत्र के प्रहरियों को सादर नमन करता हूं। आइए, संकल्प लें कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सदैव समर्पित होकर देश की सेवा करते रहेंगे।
25 जून 1975 को लागू हुआ था आपातकाल
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 25 जून 1975 का दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन देश में आपातकाल लागू किया गया था, जो मार्च 1977 तक प्रभावी रहा। इस अवधि में कई नागरिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए थे और अनेक राजनीतिक नेताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा हर वर्ष आपातकाल दिवस के अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को याद करते हुए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
आपातकाल दिवस क्या है?
'इमरजेंसी डे' भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के एक अहम और विवादित दौर की याद दिलाता है. यह उस समय को दर्शाता है जब 25 जून 1975 की रात को पूरे देश में आपातकाल (इमरजेंसी) लागू किया गया था. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में घोषित यह आपातकाल लगभग 21 महीनों तक, यानी 21 मार्च 1977 तक लागू रहा. इस दौरान कई मौलिक अधिकारों पर रोक लगा दी गई, प्रेस और मीडिया की आज़ादी पर कड़े नियंत्रण लागू किए गए और सेंसरशिप लागू की गई थी. इसके अलावा सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले कई विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था. यह दौर भारतीय राजनीति और लोकतंत्र के इतिहास में एक अहम अध्याय के तौर पर याद किया जाता है।

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