May 27, 2026

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छत्तीसगढ़ में निवेश को मिलेगा बढ़ावा, भूमि उपयोग और भवन अनुमति प्रणाली होगी पूरी तरह डिजिटल

 

रायपुर.

भारत में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) सुधारों का दायरा अब केवल उद्योग और कर व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है. अब केंद्र सरकार का फोकस शहरी नियोजन (Urban Planning), भूमि उपयोग (Land Use) और निर्माण स्वीकृति प्रक्रियाओं को आधुनिक, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनाने पर है.

इसी दिशा में भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय द्वारा “Compliance Reduction and Deregulation Reforms” के तहत राज्यों को महत्वपूर्ण सुधार लागू करने की सिफारिश की गई है. इन सुधारों का उद्देश्य शहरों को अधिक लचीला, निवेश-तैयार और आर्थिक गतिविधियों के अनुरूप बनाना है, ताकि उद्योग, आवास, वाणिज्यिक गतिविधियां और आधुनिक शहरी विकास को नई गति मिल सके. विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा केवल औद्योगिक नीति या कर छूट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कोई राज्य निवेशकों को कितनी तेज, पारदर्शी और सरल स्वीकृति प्रणाली उपलब्ध कराता है. इसी दृष्टि से छत्तीसगढ़ द्वारा किए जा रहे सुधार भविष्य के निवेश वातावरण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.

“जो प्रतिबंधित नहीं, वह अनुमति प्राप्त” मॉडल पर जोर
कैबिनेट सचिवालय ने राज्यों को “डिमांड-ड्रिवन भूमि उपयोग प्रणाली” (Demand-Driven Land Use System) अपनाने की सलाह दी है, जो “Everything is Permitted Unless Prohibited” अर्थात “जो प्रतिबंधित नहीं है, वह अनुमति प्राप्त है” के सिद्धांत पर आधारित है. इसके तहत प्रत्येक क्षेत्र में केवल प्रतिबंधित गतिविधियों की “Negative List” तय की जाएगी, जबकि अन्य सभी गतिविधियों को स्वतः अनुमति प्राप्त होगी. इस व्यवस्था से भूमि उपयोग परिवर्तन की जटिल और लंबी प्रक्रियाएं कम होंगी तथा निवेशकों को अधिक स्पष्टता और सुविधा मिलेगी. त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, केरल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने इस दिशा में पहल शुरू कर दी है. त्रिपुरा ने वर्ष 2025 में “Negative List of Industries” लागू कर इस मॉडल को व्यवहार में उतार दिया है.

Flexible Zoning और Mixed Land Use को मिल रहा बढ़ावा
छत्तीसगढ़ सरकार ने भी शहरी नियोजन और निर्माण स्वीकृति प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में आवश्यक संशोधन किए गए हैं. विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य शासन द्वारा “Flexible Zoning Framework” को बढ़ावा देते हुए मिश्रित भूमि उपयोग (Mixed Land Use) को प्रोत्साहित किया जा रहा है. संशोधित प्रावधानों के अनुसार आवासीय क्षेत्रों में रेड, ऑरेंज, ग्रीन एवं ब्लू श्रेणी के उद्योगों को प्रतिबंधित किया गया है, जबकि वाणिज्यिक क्षेत्रों में केवल रेड एवं ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों पर प्रतिबंध रहेगा. उद्योगों का वर्गीकरण छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाएगा. इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योगों से जुड़े कर्मचारियों के लिए अधिकतम 60 वर्गमीटर तक के किफायती आवास निर्माण की अनुमति दी गई है. इसके लिए अधिकतम FAR 2.0 तथा 70 प्रतिशत भू-आच्छादन की अनुमति होगी. यह व्यवस्था “Walk to Work” जैसी अवधारणाओं को बढ़ावा देने के साथ उद्योग आधारित किफायती आवास परियोजनाओं को गति देगी. इससे श्रमिकों और कर्मचारियों को कार्यस्थल के नजदीक आवास उपलब्ध हो सकेंगे, परिवहन लागत कम होगी तथा शहरों में अनियोजित विस्तार को नियंत्रित करने में भी सहायता मिलेगी.

ऑनलाइन सेवाओं और Deemed Approval से निवेशकों को मिलेगा लाभ
राज्य सरकार ने भूमि उपयोग परिवर्तन (CLU – Change of Land Use) प्रक्रिया को भी सरल और डिजिटाइज करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार नगर निगम, नगरपालिका, नगर पंचायत क्षेत्रों तथा उनकी बाहरी सीमाओं से लगे निर्धारित क्षेत्रों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ श्रेणियों की भूमि के व्यपवर्तन के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति की आवश्यकता समाप्त की गई है. इससे भूमि उपयोग परिवर्तन प्रक्रिया में तेजी आएगी, अनुमोदन स्तरों का युक्तिकरण होगा और निवेशकों को समयबद्ध सेवाएं मिल सकेंगी. साथ ही ऑनलाइन सिंगल विंडो प्रणाली, सभी NOC को ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ने तथा निर्धारित समय सीमा में स्वीकृति न मिलने पर “Deemed Approval” जैसे प्रावधानों की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उद्योग स्थापना की प्रक्रिया तेज होगी, परियोजनाओं की लागत में कमी आएगी और निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा.

ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योगों की स्थापना होगी आसान
विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को बढ़ावा देने के लिए सड़क चौड़ाई मानकों में भी युक्तिकरण किया है. संशोधित नियमों के अनुसार 0.1 हेक्टेयर तक के गैर-प्रदूषणकारी ग्रीन एवं व्हाइट श्रेणी के MSME उद्योगों के लिए न्यूनतम पहुंच मार्ग की चौड़ाई 7.5 मीटर तथा 0.1 से 0.25 हेक्टेयर तक के उद्योगों के लिए 9 मीटर निर्धारित की गई है. इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योगों की स्थापना आसान होगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा तथा औद्योगिक क्लस्टर विकास को गति मिलेगी. इसके साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना भी बढ़ेगी.

Third Party Inspection और Self Certification से घटेगा समय
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार भवन निर्माण स्वीकृतियों में देरी को समाप्त करने के लिए राज्य सरकार ने निरीक्षण एवं अनुमोदन प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण सुधार किए हैं. छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 के नियम 96 एवं 98 में संशोधन कर प्लींथ सर्टिफिकेट, Completion Certificate और Occupancy Certificate जारी करने की समय-सीमा निर्धारित की गई है. नए प्रावधानों के तहत निरीक्षण 4 दिवस के भीतर किया जाएगा तथा निरीक्षण रिपोर्ट 48 घंटे में प्रस्तुत करनी होगी. निर्धारित समय सीमा में प्रमाण पत्र जारी नहीं होने पर उसे “Deemed Approval” माना जाएगा. इसके साथ ही तृतीय पक्ष (Third Party) एजेंसियों के माध्यम से संयुक्त निरीक्षण तथा आर्किटेक्ट आधारित Self Certification व्यवस्था को भी बढ़ावा दिया गया है. इससे निर्माण परियोजनाओं में अनावश्यक देरी कम होगी, भ्रष्टाचार और प्रक्रियागत जटिलताओं में कमी आएगी तथा उद्योग और रियल एस्टेट क्षेत्र को गति मिलेगी.

ALBPMS सॉफ्टवेयर से पूरी प्रक्रिया हुई ऑनलाइन
राज्य सरकार ने भवन अनुमति प्रणाली को पूर्णतः डिजिटल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किए हैं. ALBPMS सॉफ्टवेयर के माध्यम से अब ऑनलाइन आवेदन, एकीकृत भुगतान प्रणाली, डिजिटल हस्ताक्षरित भवन योजनाएं, Auto-DCR द्वारा स्वचालित भवन परीक्षण, निर्माण प्रारंभ एवं पूर्णता की ई-सूचना तथा डिजिटल Occupancy एवं Completion Certificate जारी करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. इससे प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, समय की बचत होगी और निवेशकों को तेज एवं सरल सेवाएं मिल सकेंगी. साथ ही विभागीय समन्वय बेहतर होगा तथा नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.

छत्तीसगढ़ को मिल सकते हैं अनेक दीर्घकालिक लाभ

  • निवेश, रोजगार, अधोसंरचना और शहरी विकास को मिलेगा प्रोत्साहन
  • विशेषज्ञों के अनुसार इन सुधारों के लागू होने से छत्तीसगढ़ को अनेक दीर्घकालिक लाभ मिल सकते हैं.
  • उद्योग स्थापना और परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया तेज होगी.
  • निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और निजी निवेश आकर्षित होगा.
  • औद्योगिक एवं शहरी अधोसंरचना विकास को गति मिलेगी.
  • MSME और स्टार्टअप इकाइयों के लिए प्रक्रियाएं आसान होंगी.
  • रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
  • नियोजित शहरीकरण और आधुनिक टाउनशिप विकास को बढ़ावा मिलेगा.
  • डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी.

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में निवेशक केवल प्रोत्साहनों को नहीं, बल्कि प्रक्रियाओं की गति, पारदर्शिता और सरलता को भी प्राथमिकता देंगे. ऐसे में शहरी नियोजन और निर्माण अनुमति प्रणाली में सुधार छत्तीसगढ़ को निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दिला सकते हैं. राज्य में तेजी से बढ़ रहे औद्योगिक और शहरी विस्तार को देखते हुए ये सुधार भविष्य की आवश्यकता बन चुके हैं. समय रहते इन सुधारों को लागू कर छत्तीसगढ़ आधुनिक, निवेश-अनुकूल और तेज विकास वाले शहरों के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर सकता है.