भोपाल
छोटे तालाब में बढ़ते प्रदूषण, अतिक्रमण और सीवेज मिलने को लेकर दायर याचिका पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। तालाब के संरक्षण में हो रही लापरवाही पर एनजीटी ने केंद्र और राज्य सरकार सहित सात विभागों को नोटिस जारी किया है।
पर्यावरणविद् राशिद नूर खान ने याचिका में बताया गया है छोटा तालाब अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जल क्षमता खो रहा है। तालाब की सीमाओं से छेड़छाड़ कर मलबे की डंपिंग की जा रही है, इससे न केवल तालाब का आकार छोटा हो रहा है, बल्कि भूजल पुनर्भरण की क्षमता भी कम हो रही है।
याचिका के साथ पेश की गई तस्वीरों से स्पष्ट है कि खुले नालों और पाइपलाइनों के जरिए बिना ट्रीटमेंट के गंदा पानी सीधे तालाब में गिर रहा है, इससे तालाब में काई जमने लगी है, जिससे पानी में ऑक्सीजन कम हो रही है और जलीय जीवों के जीवन पर संकट खड़ा हो गया है।
तालाब के किनारों पर भारी मात्रा में प्लास्टिक, घरेलू कचरा और निर्माण सामग्री बिखरी पड़ी है। यह कचरा न केवल पानी के प्रवाह को रोक रहा है, बल्कि शहर के सालिड वेस्ट मैनेजमेंट की पोल भी खोल रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने ट्रिब्यूनल को बताया कि नियमों को ताक पर रखकर तालाब के सुरक्षित बफर जोन'' में लगातार अवैध निर्माण और मानवीय गतिविधियां जारी हैं, यह सीधे तौर पर पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन है।

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