March 19, 2026

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सम्राट विक्रमादित्य की गाथा केवल इतिहास नहीं,बल्कि प्रेरणा का स्रोत है: मंत्री टेटवाल सूर्योपासना कार्यक्रम में हुए शामिल

 

भोपाल 

गुड़ी पड़वा एवं वर्ष प्रतिपदा विक्रम संवत 2083 के शुभ अवसर पर प्रदेश में विक्रमोत्सव का आयोजन किया गया। इसी क्रम में कौशल विकास एवं रोजगार तथा उज्जैन के प्रभारी मंत्री  गौतम टेटवाल ने उज्जैन के पावन रामघाट पर विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत सृष्टि आरंभ दिवस के शुभ अवसर पर कोटि सूर्योपासना कार्यक्रम में सहभागिता की। साथ ही माँ शिप्रा का पूजन-अर्चन कर प्रदेश में सुख, शांति, समृद्धि कि कामना की।

विक्रम संवत केवल एक काल गणना नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रमाण

मंत्री  टेटवाल ने कहा कि यह पावन अवसर हमें हमारी महान परंपरा और गौरवशाली इतिहास की याद दिलाता है। चैत्र नववर्ष (विक्रम संवत) का प्रारंभ उज्जैन के महान सम्राट  विक्रमादित्य महाराज द्वारा किया गया था, जो भारतीय संस्कृति, ज्ञान और स्वाभिमान का प्रतीक है। विक्रम संवत केवल एक काल गणना नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सभ्यता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रमाण है। उज्जैन नगरी उसी गौरव को आगे बढ़ाते हुए निरंतर विकास की ओर अग्रसर है, जो हम सभी के लिए गर्व का विषय है।

सम्राट विक्रम की गाथा केवल इतिहास नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्त्रोत भी है

मंत्री  टेटवाल ने कहा कि विक्रम संवत, आज भी हमारे पर्व-त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों का आधार है, यह केवल एक कैलेंडर नहीं, बल्कि भारतीय अस्मिता और स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक है। इसकी स्थापना लगभग 57 ईसा पूर्व महान सम्राट विक्रमादित्य द्वारा की गई थी। सम्राट विक्रमादित्य का नाम आते ही हमारे मन में वीरता, पराक्रम और अद्भुत नेतृत्व की छवि उभरती है। उनका शासनकाल भारतीय इतिहास का स्वर्णिम युग माना जाता है। उनकी गाथा केवल इतिहास नहीं बल्कि हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

महाकाल लोक हमारी विरासत और आधुनिक विकास का अद्भुत संगम

मंत्री  टेटवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश की पावन धरती, विशेष रूप से उज्जैन, सम्राट विक्रमादित्य की कर्मभूमि रही है। उज्जैन को उस समय भारत की सांस्कृतिक और खगोलीय राजधानी माना जाता था। आज भी यह नगरी हमारे लिए आस्था, इतिहास और गौरव का केंद्र है। उज्जैन विश्व के प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में से एक है। यहां स्थित  महाकालेश्वर मंदिर और विकसित होता हुआ महाकाल लोक न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि हमारी विरासत और आधुनिक विकास का अद्भुत संगम भी है।

इस अवसर पर सांसद  अनिल फिरोजिया, विधायक  अनिल जैन कालुहेड़ा, महापौर  मुकेश टेटवाल, सभापति मती कलावती यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।