ओडिशा
ओडिशा हाईकोर्ट की जज सावित्री राठो ने रविवार को खुलकर अपनी कानूनी पेशे की यात्रा पर बात की। उन्होंने बताया कि शुरुआत में एक शख्स उनके पीछे पड़ गया था और वह जहां भी जातीं, वहां पहुंच जाता। उन्होंने बताया कि बाद में उस शख्स की जमकर कुटाई भी हुई थी। जस्टिस राठो ने बताया कि कैसे पारिवारिक परेशानी के कारण कॉलेजियम की सिफारिश के बाद भी उनके नाम पर विचार नहीं किया गया।
पीछे पड़ गया था एक शख्स
बार एंड बेंच के अनुसार, जस्टिस राठो ने बताया कि जब उन्होंने कानूनी पेशे की शुरुआत की, तब एक शख्स उनके पीछे पड़ गया था। उन्होंने कहा कि वह कोर्ट में जहां भी जातीं, वह उनके पीछे आ जाता। उन्होंने बताया कि बात तब बढ़ गई थी, जब वह उनके चैंबर में तक घुस आया था।
जस्टिस राठो ने कहा, 'जब मैंने प्रेक्टिस शुरू की, तो एक शख्स मेरा पीछा करने लगा था। मुझे लगा कि वह हमेशा कोर्ट में है। मेरे पुरुष सहकर्मियों ने मेरी मदद की। एक बार वह मेरे चैंबर में भी आ गया था, लेकिन मैंने ऐसे दिखाया कि मैंने उसे देखा ही नहीं। हालांकि, बाद में उसकी जमकर कुटाई हुई थी।'
जज बनने में हुई दिक्कत
जस्टिस राठो ने कहा कि कॉलेजियम की तरफ से जज बनने के लिए दो बार उनके नाम की सिफारिश भी की गई थी। उन्होंने कहा, 'मेरे नाम की दो बार सिफारिश की गई थी, लेकिन जो इंचार्ज थे, उन्होंने इसे नहीं माना। उन्हें मेरे परिवार से कुछ परेशानी थी।'
पुरुष सहकर्मियों की तारीफ की
उन्होंने कहा कि ये आम धारणा है कि इस पेशे में हमेशा एक महिला दूसरी महिला की मदद करती है। उन्होंने कहा कि उनका अनुभव अलग रहा है। जज ने बताया कि करियर की शुरुआत में पुरुष सहकर्मियों ने उनकी काफी मदद की है। उन्होंने कहा कि कई वकील जज लेनदेन के कारण जज बनने में संकोच करते हैं, लेकिन वो उनके लिए कभी चिंता की बात नहीं रही।
जस्टिस राठो अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर सुप्रीम कोर्ट में आयोजित Half the Nation – Half the Bench थीम पर पहली नेशनल कॉन्फ्रेंस में बोल रहीं थीं। यह आयोजन सीनियर एडवोकेट शोभा गुप्ता और महालक्ष्मी पवानी की तरफ से आयोजित किया गया था।

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