काबुल, ब्लूमबर्ग
तुर्की और कतर जैसे मुल्कों ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच मध्यस्थता कराने की कोशिश की थी, लेकिन फेल रहे। दोनों इस्लामिक देशों के बीच जारी इस जंग ने साउथ एशिया में ऐसे वक्त में तनाव बढ़ाया है, जब पड़ोस में ही ईरान और इजरायल भी लड़ रहे हैं। उस युद्ध में अमेरिका भी इजरायल संग हमले कर रहा है।
इजरायल और ईरान में जारी जंग के बीच भारत के पड़ोस में भी युद्ध तेज हो रहा है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच चल रहे युद्ध का आज चौथा दिन है। पाकिस्तान का दावा है कि उसके हमलों में अब तक 350 से ज्यादा तालिबान लड़ाके मारे गए हैं। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने दावा किया है कि उनके मुल्क ने अफगानिस्तान के 41 ठिकानों पर हमले किए हैं। इन हमलों में तालिबान की 130 चौकियों को तबाह कर दिया गया है। इसके अलावा 530 लोग जख्मी हुए हैं और साढ़े 3 सौ लोग मारे गए हैं।
पाकिस्तान के डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ ने इससे पहले ऐलान किया था कि अफगानिस्तान के साथ अब हम खुली जंग में हैं। उनका कहना था कि तालिबान ने हमारी सीमा में घुसकर हमले किए हैं और अब हम उनका जवाब देंगे। इसके बाद पाकिस्तान ने काबुल, कंधार समेत अफगानिस्तान के बड़े शहरों को टारगेट करते हुए हमले किए थे। तुर्की और कतर जैसे मुल्कों ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच मध्यस्थता कराने की कोशिश की थी, लेकिन फेल रहे। दोनों इस्लामिक देशों के बीच जारी इस जंग ने साउथ एशिया में ऐसे वक्त में तनाव बढ़ाया है, जब पड़ोस में ही ईरान और इजरायल भी जंग लड़ रहे हैं। उस युद्ध में अमेरिका भी इजरायल के साथ मिलकर हमले कर रहा है।
वहीं अफगानिस्तान का दावा है कि उसके हमलों में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं। इसके अलावा पाकिस्तान के दो मिलिट्री बेस और 19 मिलिट्री पोस्ट भी कब्जाने का दावा किया है। पाकिस्तान ने ऐसे दावों को खारिज किया है। बता दें कि बीते कई सालों से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। 2021 में अफगानिस्तान से नाटो सेनाओं ने वापसी की थी। इसके बाद पाकिस्तान को उम्मीद थी कि अब तालिबान के हाथ सत्ता लगेगी और उनके जरिए वह मनमानी कर सकेगा।
हालांकि ऐसा नहीं हुआ है और तालिबान ने अपनी धरती का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं करने दिया है। यही नहीं पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत को लेकर दोनों में मतभेद भी पैदा हो गए हैं। इसकी वजह यह है कि तालिबान का कहना है कि वह अंग्रेजों की खींची हुई डूरंड लाइन को नहीं मानता है। इसके अलावा खैबर पख्तूनख्वा में जो पश्तून आबादी है, उनके साथ उनका रिश्ता है। ऐसे में मुक्त आवाजाही की परमिशन भी होनी चाहिए। अकसर ही दोनों सीमा पर तनाव की स्थिति में रहते हैं।

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