रायपुर
वन विकास निगम में ‘डिजिटल क्रांति‘ और ‘रोजगार संगम‘ का सफल मॉडल
वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के कवर्धा परियोजना मंडल अंतर्गत बोड़ला काष्ठागार में डिजिटल प्रणाली लागू कर कार्यों को अधिक पारदर्शी और सरल बनाया गया है। साथ ही स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार देकर इसे ‘डिजिटल क्रांति‘ और ‘रोजगार संगम‘ का सफल उदाहरण बनाया गया है।
काष्ठागार में लगभग 2500 घन मीटर इमारती लकड़ी और 1200 नग जलाऊ लकड़ी का वैज्ञानिक तरीके से भंडारण किया गया है। लकड़ी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमित जांच और लंबाई के अनुसार छंटाई की व्यवस्था की गई है। इससे लकड़ी लंबे समय तक सुरक्षित रहती है और नीलामी के दौरान खरीदारों को बेहतर सुविधा मिलती है।
डिजिटल प्रणाली से बढ़ी पारदर्शिता
काष्ठागार में अब अधिकतर कार्य ऑनलाइन और डिजिटल माध्यम से किए जा रहे हैं। प्राप्त लकड़ी का डिजिटल पंजीयन कर व्यवस्थित लॉट तैयार किए जा रहे हैं। लकड़ी और जलाऊ लकड़ी की नीलामी पूरी तरह ऑनलाइन की जा रही है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और राजस्व में वृद्धि हुई है। खरीदारों को ऑनलाइन भुगतान की सुविधा दी गई है, जिससे समय और श्रम की बचत हो रही है। सेल संकल्प, कार्य आदेश और परिवहन अनुमति जैसे दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार
बोड़ला काष्ठागार केवल लकड़ी भंडारण केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीणों के लिए रोजगार का माध्यम भी बन रहा है। लकड़ी की छंटाई, लॉट निर्माण और लोडिंग जैसे कार्यों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे ग्रामीणों को गांव के पास ही नियमित रोजगार मिल रहा है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। इस प्रकार वन विकास निगम का यह प्रयास शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का उत्कृष्ट उदाहरण है। डिजिटल व्यवस्था से जहां कार्यों में पारदर्शिता आई है, वहीं रोजगार के अवसर बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

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