इंदौर
परीक्षा के दिनों में तेज लाउडस्पीकर बजाना इंदौर में पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है. इसके चलते कई स्थानों पर डीजे और लाउडस्पीकर जब्त भी किए गए हैं. इस बीच इंदौर महापौर ने धार्मिक स्थलों की मीनारों पर लगे लाउडस्पीकर हटाने की भी मांग की है. दरअसल, विगत कई दिनों से इस तरह की शिकायतें महापौर पुष्यमित्र भार्गव के पास पहुंच रही थीं कि शादी समारोह और अन्य कार्यक्रमों में तेज लाउडस्पीकर बजाने पर डीजे और लाउडस्पीकर जब्त किए गए हैं लेकिन मस्जिदों की मीनरों पर लगे लाउडस्पीकर से अभी अलग-अलग समय पर व्यापक ध्वनि प्रदूषण हो रहा है.
इन इलाकों की मीनारों से ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा
वहीं, अत्यधिक ऊंचाई पर लगे स्पीकरों से आसपास के क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है. महापौर ने बताया कि उन्हें वार्ड 72 (लोकमान्य नगर), वार्ड 41 और वार्ड 48 के निवासियों से ध्वनि प्रदूषण को लेकर अधिक शिकायतें मिली हैं. लोगों का कहना है कि मीनारों पर लगे ऊंचे लाउडस्पीकरों की आवाज पूरे क्षेत्र में फैलती है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित होता है.
ध्वनि प्रदूषण से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है
महापौर ने बताया कि पूरे वर्ष शहर में प्रतियोगी परीक्षाएं और स्कूल की परीक्षाएं चलती रहती हैं. ऐसे में ध्वनि प्रदूषण के कारण छात्रों की तैयारी प्रभावित होती है. बुजुर्गों और बीमार लोगों को भी परेशानी होती है. उन्होंने कहा कि यदि डीजे और अन्य ध्वनि उपकरणों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है, तो धार्मिक स्थलों पर लगे ऊंचे लाउडस्पीकरों के संदर्भ में भी उसी तर्ज पर कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा मैंने इस मुद्दे पर कलेक्टर को अवगत कराया है और जल्द कार्रवाई की अपेक्षा की है.
राज्य सरकार ने पहले भी दिए थे निर्देश
महापौर ने याद दिलाया कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश पर राज्य स्तर पर इस विषय में पहले भी निर्देश जारी हो चुके हैं और कार्रवाई भी की गई थी. उन्होंने कहा कि यदि ऐसे लाउडस्पीकर दोबारा लगाए गए हैं, तो प्रशासन को एक बार फिर विस्तृत जांच करनी चाहिए.
इंदौर में ध्वनि प्रदूषण पर सख्ती, दो डीजे जब्त, एफआईआर दर्ज
इंदौर में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के अनियंत्रित उपयोग पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए तेजाजी नगर थाना क्षेत्र के श्री कुंज गार्डन में तेज आवाज में डीजे साउंड बजाए जाने की शिकायत पर प्रशासनिक दल ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की. साउंड संचालक विकास दाने के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए डीजे उपकरण जब्त कर लिए गए.
इसी प्रकार हीरानगर थाना क्षेत्र के चन्द्रगुप्त चौराहे पर भी निर्धारित ध्वनि सीमा का उल्लंघन पाए जाने पर मल्हारगंज एसडीएम के दल ने डीजे जब्त किया तथा संचालक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया प्रारंभ की. जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि विवाह समारोह, सामाजिक कार्यक्रम अथवा अन्य आयोजनों में ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग निर्धारित समय-सीमा एवं ध्वनि मानकों के अनुरूप ही किया जाए. आदेशों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध जब्ती, दंडात्मक कार्रवाई एवं एफआईआर दर्ज की जाएगी.

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रीवा के राजस्व विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: बिना किसी सरकारी आदेश के बदल दिया गया किसान की जमीन का नक्शा, RTI में हुआ सनसनीखेज खुलासा सिरमौर/रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के तहसील सिरमौर अंतर्गत ग्राम पिपरी में राजस्व अभिलेखों के साथ गंभीर छेड़छाड़ और ‘डिजिटल फर्जीवाड़े’ का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक किसान की निजी भूमि का नक्शा बिना किसी आवेदन, बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कंप्यूटर रिकॉर्ड (पोर्टल) पर बदल दिया गया है। क्या है पूरा मामला? ग्राम पिपरी निवासी आशीष मिश्रा (पिता श्री सम्पत प्रसाद मिश्रा) ने अपनी आराजी क्रमांक 88/1 एवं 88/2 के नक्शे में हुई संदिग्ध तरमीम (संशोधन) को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी। महीनों के चक्कर लगवाने और प्रथम अपील के बाद जो जवाब विभाग से मिला, उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI में विभाग ने खुद स्वीकारी ‘अंधेरगर्दी’: लोक सूचना अधिकारी एवं नायब तहसीलदार वृत्त बैकुण्ठपुर ने अपने लिखित प्रतिवेदन (पत्र क्रमांक 292/2026 दिनांक 06/02/2026) में स्वीकार किया है कि: कंप्यूटर नक्शे में तो तरमीम (बदलाव) दिख रहा है, लेकिन मूल पटवारी नक्शा शीट (Field Map) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। राजस्व अभिलेखों (खसरा आदि) में इस तरमीम से संबंधित कोई भी प्रविष्टि दर्ज नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को यह भी नहीं पता कि यह बदलाव किस वर्ष में हुआ और किस अधिकारी के आदेश से किया गया। यानी बिना किसी फाइल और बिना किसी आदेश के रातों-रात कंप्यूटर पर नक्शा बदल दिया गया। पीड़ित का आरोप: “राजस्व अमले की मिलीभगत से हुआ खेल” पीड़ित आशीष मिश्रा का कहना है कि उन्होंने इसके लिए दो बार आवेदन दिए और कई बार अधिकारियों के चक्कर काटे। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी और संबंधित राजस्व कर्मचारियों ने निजी स्वार्थ के चलते अभिलेखों में कूट-रचना (Forgery) की है। पीड़ित ने अब एसडीएम सिरमौर से मांग की है कि इस अवैध तरमीम को तत्काल निरस्त किया जाए और उन दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए जिन्होंने सरकारी पोर्टल के डेटा के साथ छेड़छाड़ की है। अधिकारियों की चुप्पी: बिना आदेश के नक्शा बदलने का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘डिजिटल सेंधमारी’ को सुधारता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे उच्च न्यायालय (High Court) की शरण लेंगे। संपर्क हेतु (Contact Info): आशीष मिश्रा (पीड़ित) ग्राम पिपरी, तहसील सिरमौर, रीवा मोबाइल: 8959446240