नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने शनिवार को भारतीय शहरों की सूरत बदलने के लिए 'अर्बन चैलेंज फंड' (UCF) को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार अगले पांच वर्षों में ₹1 लाख करोड़ की सहायता राशि प्रदान करेगी। सरकार का लक्ष्य इस फंड के जरिए 2031 तक शहरी बुनियादी ढांचे में कुल ₹4 लाख करोड़ का निवेश जुटाना है।
फंडिंग का बदला अंदाज
यह योजना भारत के शहरी विकास में एक बड़े बदलाव का संकेत है। अब शहर केवल सरकारी Grants पर निर्भर नहीं रहेंगे। केंद्र सरकार किसी भी प्रोजेक्ट की लागत का केवल 25% हिस्सा देगी। शहरों को प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए कम से कम 50% रकम बाजार (बैंक लोन, म्युनिसिपल बॉन्ड या प्राइवेट निवेश) से जुटानी होगी। शेष 25% हिस्सा राज्य सरकार या नगर निगम को वहन करना होगा।
शहरों के बीच होगी 'टक्कर'
फंड के लिए शहरों का चयन 'चैलेंज मोड' के जरिए होगा। इसका मतलब है कि जिन शहरों के प्रोजेक्ट प्रस्ताव सबसे प्रभावी, सुधारवादी और परिणामोन्मुखी होंगे, उन्हें ही फंडिंग मिलेगी। यह फंड 2030-31 तक चालू रहेगा और भविष्य में इसे 2034 तक बढ़ाया जा सकता है।
पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए विशेष कवच
छोटे शहरों और पहाड़ी राज्यों (North-East) की मदद के लिए सरकार ने ₹5,000 करोड़ का एक विशेष कॉर्पस बनाया है। यह उन नगर निकायों के लिए 'क्रेडिट गारंटी' का काम करेगा जो पहली बार बाजार से कर्ज ले रहे हैं। इसका उद्देश्य इन निकायों को इतना मजबूत बनाना है कि वे खुद निवेश जुटाने में सक्षम हो सकें।
किन कामों पर होगा खर्च?
इस फंड का मुख्य फोकस तीन प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा:
शहरों को आर्थिक विकास का हब बनाना।
पुराने शहरी केंद्रों और हेरिटेज साइट्स का पुनर्विकास।
जल आपूर्ति और स्वच्छता प्रणालियों में सुधार (जैसे सीवेज नेटवर्क, कचरा प्रबंधन और बेहतर परिवहन)।

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