नई दिल्ली
केंद्रीय बजट 2026 का ऐलान हो चुका है और भारत सरकार ने इलेक्ट्रोनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत खर्च को लगभग दोगुना करने का ऐलान कर दिया है. इस रकम को करीब 23 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40 हजार करोड़ रुपये कर दिया है.
इस भारी-भरकम बजट से भारतीय इलेक्ट्रोनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री मजबूत होगी. इससे भारतीय घरेलू सप्लाई चेन को स्ट्रांग किया जाएगा. साथ ही भारत में विदेशी कंपनियां भारत में अपनी यूनिट लगाएंगी और भारत में निवेश करेंगी.
फोन टीवी, AC आदि को होगा फायदा
इस स्कीम से स्मार्टफोन, लैपटॉप और माइक्रोवेव, फ्रिज, टोस्टर जैसे घरेलू प्रोडक्ट के मैन्युफैक्चरिंग पर विदेशों पर निर्भरता कम होगी. इससे प्रोडक्ट सस्ते होंगे या नहीं, वो तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा. हालांकि अगर टीवी, स्मार्टफोन और अन्य कंज्यूमर इलेक्ट्रोनिक्स प्रोडक्ट तैयार करने वाले मैन्युफैक्चरर को सस्ते कंपोनेंट मिलते हैं तो आने वाले दिनों में सस्ते प्रोडक्ट भी भारत में दस्तक देंगे. साथ ही यहां नौकरियों के भी नए अवसर प्राप्त होंगे.
वित्त मंत्री ने कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम अप्रैल 2025 में 22,919 करोड़ रुपये की रकम के साथ शुरू की गई थी. इस स्कीम के तहत मिले इनवेस्टमेंट प्रपोजल और टारगेट को देखते हुए सरकार ने रकम बढ़ाने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि इस स्कीम की रकम को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है.
केंद्रीय कैबिनेट ने मार्च में इस स्कीम के लिए 22,919 करोड़ रुपये की रकम के साथ मंजूरी दी थी. इस स्कीम के तहत बड़े आउटकम की उम्मीद है. इससे 4.56 लाख करोड़ रुपये का प्रोडक्शन होगा और करीब 59,350 करोड़ रुपये का एडिशनल इनवेस्टमेंट मिलेगा.
46 आवेदनों को मंजूरी दी जा चुकी है
अब तक स्कीम के तहत 46 आवेदनों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें कुल प्रोपजल इनवेस्टमेंट 54,567 करोड़ रुपये का है. इससे लगभग 51,000 लोगों को सीधे रोजगार मिलने की उम्मीद जताई गई है.
आईटी मंत्रालय ने बीते महीने ही Foxconn, Tata Electronics, Samsung, Dixon Technologies और Hikalco Industries जैसी कंपनियों के 22 आवेदन को अप्रूवल दिए हैं.
इन इलेक्ट्रोनिक्स पार्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा
सरकार इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत इलेक्ट्रोनिक्स पार्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना चाहते हैं. इसमें कई पार्ट्स शामिल हैं, जिनकी लिस्ट ये है.
डिस्प्ले मॉड्यूल
सब-असेंबली कैमरा मॉड्यूल
प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली (PCBA)
लिथियम सेल एनक्लोजर
रेजिस्टर
कैपेसिटर
फेराइट्स आदि
इन कंपोनेंट का इस्तेमाल स्मार्टफोन, लैपटॉप और माइक्रोवेव, फ्रिज, टोस्टर जैसे घरेलू उपकरणों में होता है.
PLI से कितनी अलग है कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम
इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, सरकार की पहले की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम से अलग है. PLI में सब्सिडी प्रोडक्शन से कनेक्टेड होती है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम में इंसेंटिव तीन अहम पैमानों पर तय किए गए हैं
सालाना रोजगार सृजन
पूंजीगत खर्च (कैपेक्स)
सालाना उत्पादन
Apple और Samsung जैसी कंपनियों के भारत में एक्स्ट्रा असेंबली यूनिट्स लगाने केबाद भी देश में वैल्यू एडिशन 15-20% के आसपास है. सरकार इसको बढ़ाकर 30-40% तक करना चाहती है.

More Stories
Maruti Suzuki August Offers: अगस्त में कारों पर बंपर डिस्काउंट, Grand Vitara से Baleno तक ₹1.55 लाख तक का फायदा
Nifty 50 में बड़ा बदलाव: करीब 3 दशक बाद Wipro बाहर, BSE की हुई एंट्री
Bajaj Pulsar N160 S और N160 SS लॉन्च, दमदार इंजन के साथ मिले नए फीचर्स; जानें कीमत और खासियतें