एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न
भोपाल
महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि प्रदेश में पोषण ट्रेकर एप के माध्यम से आंगनवाड़ी केन्द्रों पर पंजीकृत बच्चों के शारीरिक माप (ऊंचाई, वजन एवं आयु के अनुपात में पोषण स्थिति) से संबंधित आंकड़ों का सतत विश्लेषण किया जा रहा है। इन आकड़ों के आधार पर राज्य में पोषण स्तर में सुधार के लिए त्वरित एवं क्षेत्र विशेष की आवश्यकता अनुसार कार्ययोजना बनाई जा रही है। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि पोषण ट्रेकर ऐप न केवल बच्चों के शारीरिक माप बल्कि बच्चों के कुपोषण की स्थिति में बोनापन, कम वजन की पहचान में भी सहायक है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि निचले स्तर के अमले इस ऐप का उपयोग सही तरीके से कर रहे है अथवा नहीं। इसके लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, सुपरवाइजर सभी को तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय करनी होगी। उन्होंने कहा कि निरंतर मॉनिटरिंग करने से त्रुटि को पकड़ा जा सकेगा। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि जिस तरह झाबुआ जिले में 'मोटी आई' के कन्सेप्ट से कुपोषण में कमी हुई है। इसी तरह अधिकारियों को नवाचार करना चाहिए। हर बच्चे का रिकार्ड रखें, उनकी निगरानी करें और अधिक कमजोर बच्चों को चिकित्सीय सहयोग उपलब्ध कराएं।
अपर मुख्य सचिव महिला बाल विकास श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने कहा कि पोषण ट्रेकर ऐप के आँकड़े और वास्तविक आँकड़ों मे फर्क इसलिए दिखता है क्योंकि हम सही मॉनिटरिंग नहीं कर रहे है। हर स्तर पर डेटा की मॉनिटरिंग होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश पहला राज्य है जहॉ बालिकाओं के लिए लाड़ली लक्ष्मी योजना शुरू कि गई, महिलाओं को हर महीने लाड़ली बहना के तहत निश्चित राशि अंतरित की जा रही है, पर इस बात की मॉनिटरिंग भी होनी चाहिए कि महिलाएं इस राशि का उपयोग कर अपने बच्चों के पोषण पर ध्यान रख रही है अथवा नहीं। अपर मुख्य सचिव श्रीमती शमी ने कहा कि यह कार्यशाला डिजिटल इंडिया मिशन के अनुरूप एक डेटा-ड्रिवन अप्रोच के द्वारा प्रदेश के बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने और उन्हें सुपोषण की ओर ले जाने मे महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।
आयुक्त महिला बाल विकास श्रीमती सूफिया फारूकी वली ने कहा कि कुपोषण एक बड़ी समस्या है जिसके अनेक कारण है। जिस क्षेत्र मे कुपोषण के आँकडे बड़े हुए है, वहां पर संबंधित अधिकारी को हर स्तर पर इसकी जाँच करना होगी। उन्होंने कहा कि अधिकारी को एनआरसी की पूरी जानकारी होना चाहिए कि उसमें कितने बेड खाली है, डॉक्टर्स से निरंतर बात कर SAM, MAM बच्चों की जानकारी लें। कुपोषण को दूर करने लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय अत्यन्त महत्वपूर्ण है। आयुक्त श्रीमती वली ने कहा कि पोषण ट्रेकर ऐप में सही उपयोग से कुपोषण की पहचान करना, समय पर हस्तक्षेप करना और कुपोषण को कम करना संभव है। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों जैसे स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के बीच कनर्वेजेन्स सुनिश्चित करके अधिक प्रभावी ढंग से काम किया जा सकता है।
इस अवसर पर संयुक्त संचालक श्रीमती स्वर्णिमा शुक्ला ने पीपीटी के माध्यम से पोषण ट्रेकर ऐप तथा कुपोषण की जिले वार स्थिति की जानकारी दी। कार्यशाला में विभागीय अधिकारियों को भारत सरकार के पोषण ट्रेकर ऐप एवं राज्य स्तर से क्रियान्वित संपर्क ऐप के बारे में तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया गया।

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