वाशिंगटन
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों (फोर्डो, नतांज और इस्फहान) पर हमला कर उन्हें पूरी तरह नष्ट कर दिया है। ट्रंप ने कहा, 'ईरान अपनी परमाणु फैसिलिटी को फिर से नहीं बना पाएगा। वह स्थान चट्टानों के नीचे है और पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। हमारे बी-2 पायलटों ने शानदार काम किया है।' इस हमले को 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' नाम दिया गया था, जो इजरायल-ईरान संघर्ष में अमेरिका की सीधी भागीदारी का पहला उदाहरण है।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवाद का केंद्र रहा है। फोर्डो पहाड़ के नीचे 300 फीट की गहराई में बना है। इसे हाई क्वालिटी के यूरेनियम भंडार का प्रमुख केंद्र माना जाता है। अमेरिका ने 14 जीबीयू-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर (बंकर बस्टर) बमों का इस्तेमाल किया, जो केवल बी-2 बॉम्बर्स ही ले जा सकते हैं। इसके अलावा, इस्फहान पर 24 टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दागी गईं। ट्रंप ने इसे ऐतिहासिक सफलता करार दिया। मगर, ईरानी अधिकारियों ने दावा किया कि उनकी परमाणु सामग्री पहले ही सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दी गई थी।
हमले के बाद रेडिएशन के खतरे पर नजर
ईरान ने अमेरिका के हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे खतरनाक और गैरकानूनी बताया। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था ने कहा कि रेडिएशन स्तर में कोई वृद्धि नहीं देखी गई। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने जवाबी हमला किया तो और कड़े हमले होंगे। इस बीच, इजरायल ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले जारी रखे हैं। यह संघर्ष मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा सकता है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से सीजफायर का ऐलान कर दिया गया है।

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