रात में भी पढ़ाई कर रहे बैगा आदिवासी बच्चे, दूर हुई बाधा
बिलासपुर,
प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) अंतर्गत जिले के कोटा विकासखण्ड के सुदूर वनांचल ग्रामों – सरगोड़ एवं चिखलाडबरी के विशेष जनजाति समूह बैगा परिवारों को सौर संयंत्रों के माध्यम से प्रकाश व्यवस्था का लाभ मिल रहा है। शासकीय योजनाओं का लाभ अब दूरस्थ आदिवासी अंचलों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। शासन-प्रशासन ने बुनियादी सुविधाएं पहुंचाकर जनजातीय समुदायों के जीवन में सकारात्मक बदलाव की नींव रखी है।
इन क्षेत्रों में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीव्हीटीजी) से जुड़े 61 बैगा जनजाति परिवार, 123 आदिवासी परिवार एवं 25 अन्य परिवार/घरों को जिला कलेक्टर संजय अग्रवाल के मार्गदर्शन में डीएमएफ मद से स्वीकृत राशि रु 222.6 लाख की लागत से ऑफग्रिड सौर सयत्रों के माध्यम से विद्युतीकरण कर प्रकाश व्यवस्था का कार्य 100 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। कोटा ब्लाक के ग्रामीण खासकर बैगा जनजाति एवं अन्य लोग प्रकाश व्यवस्था का लाभ ले रहे है।
इस क्रम में ग्राम सरगोड़ के मजराटोला, इमलीपारा, स्कूलपारा, डिपरापारा, धनुहारपारा में कुल 24 किलोवॉट क्षमता के सौर संयत्र स्थापना का समस्त कार्य एवं ग्राम चिखलाडबरी के मजराटोला बेल्हाकछार, कटेलीपारा, स्कूलपारा, सौंतापारा-01 तथा सौतापारा-02 में सौर संयत्र स्थापना का समस्त कार्य पूर्ण हो चुका है। इसी प्रकार चिखलाडबरी में कुल 23.7 किलोवॉट क्षमता के सौर संयंत्र एवं स्थापित कर पॉवर डिस्ट्रिव्यूशन नेटवर्क के माध्यम से बैगा जनजाति, आदिवासी एवं अन्य घरों में प्रकाश व्यवस्था एवं स्ट्रीट लाईट के माध्यम से गली मोहल्ले में पथ प्रकाश व्यवस्था की गई है। प्रत्येक घरों में भी 05 लाईट, 01 साकेट की व्यवस्था की गई है जिससे ग्रामवासियों को रात्रि में सौर संयंत्र के माध्यम से प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध हो रही है। ग्रामीण सूर्यास्त के पश्चात अपने दैनिक जीवन के कार्याें, महिलाएं सिलाई बुनाई एवं अन्य घरेलू कार्य एवं बच्चे बिना किसी रूकावट के पढ़ाई-लिखाई रहे है। गांवों की सड़कों में स्ट्रीट लाईट लगने से ग्रामवासी कीड़े-मकोडे़ एवं जंगली जानवरों से अब बिना डरे आवागमन कर रहे है।

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