नई दिल्ली
देश में जनगणना 1 मार्च, 2027 से शुरू होगी। इस बार जनगणना में जाति का कॉलम भी होगा। हर घर पहुंचकर जनगणना में जुटे कर्मचारी सभी की जाति भी पूछेंगे। हालांकि, बर्फबारी वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जनगणना अगले साल अक्टूबर में ही शुरू हो जाएगी। इनमें लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड शामिल है। बाकी राज्यों में एक मार्च, 2027 से इसकी शुरुआत होगी।
'एनडीटीवी' ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकार इस बार दो चरणों में जनगणना करवा रही है। इसमें सवालों की लंबी लिस्ट शामिल होगी, जिसमें जाति और उप-जातियों पर भी सवाल शामिल होंगे। 30 अप्रैल को मोदी सरकार ने कैबिनेट बैठक में जाति जनगणना करवाने का फैसला लिया था। सरकार ने बताया था कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि हमारा सामाजिक ताना-बाना राजनीतिक दबाव में न आए, यह निर्णय लिया गया है कि जाति गणना को एक अलग सर्वेक्षण के रूप में आयोजित करने के बजाय मुख्य जनगणना में शामिल किया जाना चाहिए।
देश में आमतौर पर हर दस साल में जनगणना होती रही है। आखिरी बार साल 2011 में जनगणना करवाई गई थी। इसके बाद 2021 में कोरोना महामारी की वजह से जनगणना को टाल दिया गया था। विपक्ष लगातार जाति जनगणना करवाने की मांग करता रहा है। कैबिनेट में मुहर लगने के बाद विपक्षी दलों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया था।
साल 1872 में पहली बार जनगणना की देश में शुरुआत हुई थी। इसका मकसद सामाजिक तानेबाने को समझना था। हालांकि, शुरुआत में तो जाति से जुड़े सवाल जनगणना में शामिल थे, लेकिन बाद में इसमें बदलाव किया गया। पिछली बार 2011 में हुई जनगणना में 29 सवाल पूछे गए थे, जिसमें रोजगार, मातृभाषा के साथ-साथ अन्य सामान्य सवाल शामिल थे। 16 साल बाद हो रही जनगणना में इस बार जाति का फिर से सवाल पूछा जाएगा।

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