नई दिल्ली.
ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कल भारतीय अर्थव्यवस्था पर अपना पॉजिटिव नजरिया रखा. इसके साथ ही इस एजेंसी ने पाकिस्तान के बैंकिंग सेक्टर पर भी अपनी राय रखी. मूडीज रेटिंग्स ने कहा कि उसने बेहतर ऑपरेशन कंडीशन और मजबूत फाइनेंशियल परफॉर्मेंस के चलते पाकिस्तान के बैंकिंग सेक्टर पर अपना नजरिया स्थिर से बदलकर सकारात्मक कर दिया है. यह बदलाव पाकिस्तान सरकार के (Caa2 सकारात्मक) बेहतर दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसे बैंकों द्वारा सॉवरेन लोन में अहम जोखिम से सपोर्ट मिला है. चरमाराती अर्थव्यवस्था और नकदी संकट के बीच यह खबर पाकिस्तान के लिए राहत लेकर आई है.
मूडीज ने रिपोर्ट में क्या कहा
मूडीज ने रिपोर्ट में कहा, “हमने पाकिस्तान के बैंकिंग सिस्टम पर अपना नजरिया स्टैबल से पॉजिटिव में बदल दिया है.” इससे पहले मूडीज ने आखिरी बार 3 मार्च, 2023 को पाकिस्तान के बैंकिंग क्षेत्र की रेटिंग घटाई थी, जिसमें पांच प्रमुख बैंकों – एलाइड बैंक लिमिटेड (एबीएल), हबीब बैंक लिमिटेड (एचबीएल), एमसीबी बैंक लिमिटेड (एमसीबी), नेशनल बैंक ऑफ पाकिस्तान (एनबीपी) और यूनाइटेड बैंक लिमिटेड (यूबीएल) की लॉन्ग टर्म डिपॉजिट रेटिंग को CAA1 से घटाकर CAA3 कर दिया था.
मूडीज ने बताया, “बैंकिंग सेक्टर पर हमारा पॉजिटिव आउटलुक पाकिस्तान सरकार के (CAA2 पॉजिटिव) सकारात्मक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है, जिसमें पाकिस्तानी बैंकों की सरकारी सिक्योरिटीज की बड़ी होल्डिंग के जरिए संप्रभुता में महत्वपूर्ण जोखिम है, जो कुल बैंकिंग परिसंपत्तियों का लगभग आधा हिस्सा है. हालांकि, इस रिपोर्ट के अनुसार, “पाकिस्तान की लॉन्ग टर्म लोन स्टैबिलिटी में जोखिम बना हुआ है, देश की राजकोषीय स्थिति अभी भी बहुत कमजोर है.”
भारत को लेकर पॉजिटिव आउटलुक
मूडीज रेटिंग्स ने कहा है कि भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर अगले वित्त वर्ष (2025-26) में 6.5 फीसदी से अधिक रहेगी. बैंकिंग क्षेत्र के लिए स्थिर परिदृश्य का अनुमान लगाते हुए मूडीज ने कहा कि हालांकि अगले वित्त वर्ष में भारतीय बैंकों का परिचालन वातावरण अनुकूल बना रहेगा, लेकिन हाल के वर्षों में पर्याप्त सुधार के बाद उनकी परिसंपत्ति की गुणवत्ता में मामूली गिरावट आएगी और बिना गारंटी वाला खुदरा कर्ज, सूक्ष्म वित्त ऋण और छोटी कारोबारी कर्ज पर कुछ दबाव रहेगा.
बता दें कि पाकिस्तान पिछले 4 सालों से नकदी संकट और बढ़ती महंगाई से जूझ रहा है. खराब आर्थिक हालात से निपटने के लिए पाकिस्तान सरकार चीन और सऊदी अरब समेत कुछ देशों से कर्ज ले चुका है, साथ ही इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड से भी भारी कर्ज लिया है.

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